रायपुर 24 अगस्त 2022. बस्तर के शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा राजभवन के आदेशों की अवहेलना करने संबंधी खबर प्रकाशन होने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन का बयान आया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद पाठक ने स्वतंत्र बोल से कहा कि
“राजभवन के भुगतान संबंधी आदेशों को हमने कार्यपरिषद में प्रस्ताव रखा, जहा परिषद् के सदस्यों ने छह साल पुराना मामला होने और 25 लाख से अधिक भुगतान होने पर उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता से सलाह लेने का निर्णय लिया, तो महाधिवक्ता को प्रकरण भेजा गया है..जैसे ही उनका अभिमत मिलता फिर उसे कार्यपरिषद में रखा जायेगा, उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जायेगा।”
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जब कुलसचिव विनोद पाठक को पूछा गया कि कुलाधिपति का आदेश महत्वपूर्ण है या कार्यपरिषद का? तो वे जवाब देने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने ने कहा कि आप कुलपति से बात करे।

कुलसचिव विनोद पाठक के बातो से स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन राजभवन के आदेशों की अपेक्षा कार्यपरिषद को ज्यादा महत्त्व देता है या कहे कि कार्यपरिषद के सामने राजभवन और कुलाधिपति को बौने जैसे मानता है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन कार्यपरिषद और उसके विधायक सदस्यों को राजभवन के अपेक्षा ज्यादा पावरफुल समझता है,, जबकि वास्तविकता इसके उलट है। राजभवन के निर्देशों पर कार्यपरिषद में सदस्य नियुक्त किये जाते है, कुलाधिपति विश्वविद्यालयो के प्रधान होते हैं और विश्वविद्यालयों के बोर्ड, कार्य-परिषद एवं विद्या-परिषद में सदस्यों की नियुक्ति एवं नामनिर्देशन करने का पूरा अधिकार है। ऐसे में कुलसचिव पाठक का बयान बेहद गैर जिम्मेदाराना है।
दरअसल कंप्यूटर खरीदी मसला छह साल पुराना साल 2016 का है, जो काफी विवादित रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव भुगतान करने से बचना चाहते है जिसके लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाया जा रहा है।
कमीशन की लालच में रोका पेमेंट, राज्यपाल ने दिया भुगतान का आदेश.. छह सालो बाद होगा भुगतान
