मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार, एसडीएम जिम्मेदार: राजस्व अधिकारियो और जमीन दलालो का सिंडिकेट, जाँच में फूटा बड़ा घोटाला

स्वतंत्र बोल
रायपुर 27 दिसंबर 2023.  केंद्र सरकार के भारत माला परियोजना में भू अर्जन और मुआवजा वितरण में गड़बड़ीयां की गई। राजस्व अधिकारियो और जमीन दलालो ने सिंडिकेट बनाकर मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की और करोडो का वारा न्यारा कर दिया।

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भारत माला परियोजना अंतर्गत अभनपुर ब्लॉक में हुए भू अर्जन और मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की पुष्टि जाँच अधिकारी ने की है। स्वतंत्र बोल द्वारा प्रमुखता से उठाये गए इस मुद्दे पर जाँच अधिकारी ने रिपोर्ट कलेक्टर को सौपा है जिसमे तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू को जिम्मेदार ठहराया गया है। भारत माला परियोजना अंतर्गत निर्माणाधीन एक्सप्रेस वे में अभनपुर ब्लॉक में करीब 700 से अधिक किसानो की भूमि सड़क निर्माण के लिए ली गई। जिसके बदले में किसानो को मुआवजा भी दिया जाना था। राजस्व अधिकारियों ने इसी भू अर्जन और मुआवजा वितरण में खेल कर दिया है।

दस्तावेजों के अनुसार उरला में स्वामी बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड के संचालक की जमीन खसरा क्रमांक 871/6 और 871/20 का भू अर्जन एसडीएम अभनपुर द्वारा किया गया था। जमीन के अधिग्रहण के संबंध में 3डी और राजपत्र में प्रकाशन किया गया पर मुआवजा वितरण के दौरान के भूमि स्वामी स्वामी बिल्डकॉन लिमिटेड की जगह हृदयलाल दृतलहरे को करोडो का भुगतान राजस्व अधिकारियो के द्वारा किया गया। जाँच रिपोर्ट में एसडीएम ने पाया कि “भू स्वामी के स्थान पर अन्य व्यक्ति को 1 करोड़ 34 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जो तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी निर्भय कुमार साहू द्वारा मुआवजा भुगतान में गंभीर अनियमितता किया गया।”

पटवारी आरआई और एसडीएम दोषी-

मुआवजा वितरण में तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू द्वारा मनमानी की गई। तत्कालीन स्थानीय विधायक के सरंक्षण में श्री साहू ने नियमो के विपरीत भू अर्जन और मुआवजा वितरण किया। बंदरबाट के खेल में पटवारी योगेश देवांगन, आरआई रोशन वर्मा सहित अन्य राजस्व अफसर शामिल रहे और खुले तौर पर पद अधिकारों का दुरुपयोग किया। तत्कालीन एसडीएम साहू के अभनपुर में दबदबा ऐसा था कि उनके अनुविभाग में पदस्थ रहते आरआई ने तीन महीने तक सीमांकन रिपोर्ट ही जमा नहीं किया। उनके ट्रांसफर के बाद ही रिपोर्ट जाँच अधिकारी को उपलब्ध कराया गया।
जाँच में दोषी पाए जाने के बाद भी तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू सारा दोष पटवारी और आरआई पर मढ़ते रहे। उन्होंने स्वतंत्र बोल से कहा कि
“जाँच अधिकारी ने उनका पक्ष सुने बिना ही जाँच किया है, मैंने अपना पक्ष कलेक्टर के समक्ष रख दिया है.. मुआवजा वितरण के लिए पटवारी और आरआई की रिपोर्ट के आधार पर ही मुआवजा दिया गया है।” 

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