स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 14 सितम्बर 2026 सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई। जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी। महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी रही। खासकर प्याज, चीनी और लहसुन महंगे हुए हैं। इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की चिंता है।
खाद्य महंगाई 5.95 फीसदी पर पहुंची
अगस्त में खुदरा खाद्य महंगाई दर जुलाई के 5.52 फीसदी से बढ़कर 5.95 फीसदी हो गई। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 5.64 फीसदी और शहरी इलाकों में 6.13 फीसदी रही।
प्याज की महंगाई जुलाई के 22.54 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 48.27 फीसदी हो गई। लहसुन की महंगाई भी 35.36 फीसदी से बढ़कर 43.60 फीसदी पहुंच गई। वहीं अदरक की महंगाई 83.57 फीसदी से घटकर 73.82 फीसदी रही।
प्याज की महंगाई जुलाई के 22.54 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 48.27 फीसदी हो गई। लहसुन की महंगाई भी 35.36 फीसदी से बढ़कर 43.60 फीसदी पहुंच गई। वहीं अदरक की महंगाई 83.57 फीसदी से घटकर 73.82 फीसदी रही।
टमाटर और आलू ने दी थोड़ी राहत
कई सब्जियों की कीमतों में गिरावट से खाद्य महंगाई का असर कुछ कम हुआ। अगस्त में टमाटर की कीमतों में 31.09 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। जुलाई में यह गिरावट 4.60 फीसदी थी।
आलू की महंगाई दर अगस्त में -13.14 फीसदी रही। जुलाई में यह -16.56 फीसदी थी। भिंडी की कीमतों में भी 5.41 फीसदी की गिरावट आई।
RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर महंगाई
अगस्त की महंगाई दर उस स्तर पर पहुंच गई है, जो इस साल की शुरुआत में लागू नई उपभोक्ता कीमत श्रृंखला के बाद सबसे ज्यादा है। भारतीय रिजर्व बैंक का मध्यम अवधि का लक्ष्य 4 फीसदी है।
आगे किन चीजों पर रहेगी नजर
महंगाई का अगला रुख मानसून, फसल उत्पादन और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर निर्भर करेगा। सामान्य बारिश से फसल बेहतर रहने पर कीमतों को राहत मिल सकती है। वहीं मौसम खराब रहने पर खाद्य महंगाई बढ़ सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें भी बड़ी चिंता हैं। तेल महंगा होने पर ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई पर फिर दबाव बन सकता है। सोमवार को जारी आंकड़े शुरुआती हैं और इनमें बाद में बदलाव हो सकता है।


