रायपुर 2 अप्रैल 2022. स्मार्ट बोर्ड खरीदी में गड़बड़ी कर मलाई खाने वाले अफसरों को अब कार्यवाही का डर सता रहा है, जिसके चलते विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उच्च न्यायालय के वकील से सलाह माँगा है। स्मार्ट बोर्ड खरीदी में गड़बड़ी सार्वजानिक होने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन के अधिकारी दामन बचाने में तरह तरह के हथकंडे अपना रहे है। दरअसल शिकायतकर्ता ने समुचित कार्यवाही ना होने पर कोर्ट में याचिका दायर करने संबंधी पत्र विश्वविद्यालय प्रबंधन को दिया है जिसके बाद घोटालेबाज जिम्मेदार अधिकारी परेशान है। सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उच्च न्यायालय के अधिवक्ता से अभिमत माँगा है ताकि समय पूर्व कार्यवाही से बचा जा सके।
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कुलपति केशरीलाल वर्मा, कुलसचिव गिरीशकांत पांडेय और उपकुलसचिव शैलेन्द्र पटेल ने एक राय होकर नियमो का उल्लंघन कर स्मार्ट बोर्ड ख़रीदा। गड़बड़ी सामने आने पर बजाये जाँच कराने मामले को दबाने में लगे हुए है।

बताते है की इनकी तिकड़ी ने विश्वविद्यालय में बड़े बड़े काम किया है। नैक टीम को दिखाने गार्डनिंग के नाम पर लाखो रुपये फूंका है तो रजिस्ट्रार द्वारा आवास खरीदी की जाँच उच्च शिक्षा में पेंडिंग है। शिकायतों की गहन जाँच हो तो रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार को कृष्ण जन्मस्थान के दर्शन करने पड़ेंगे। वही दोबारा कुलपति बनने का ख्वाब सजोय प्रोफ़ेसर केशरीलाल वर्मा की समय से पूर्व विदाई हो सकती है। उधर स्मार्ट बोर्ड खरीदी में रूसा मद के दुरुपयोग और नियमो के उल्लंघन पर उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से जानकारी माँगा है।
