विभागीय मंत्री के कथित रिश्तेदार को भ्रष्टाचार की छूट? जाँच और परीक्षण के नाम पर खानापूर्ति.. बीजेपी ने मंत्री से पूछा आखिर किन कारणों से भ्रष्ट अधिकारी पर नहीं हो रही कार्यवाही?

रायपुर 20 अक्टूबर 2022.  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के भ्रष्ट उपकुलसचिव शैलेन्द्र पटेल पर गंभीर आरोपों और जाँच के बाद भी कार्यवाही नहीं होने पर उच्च शिक्षा मंत्री बीजेपी के निशाने पर है। बीजेपी ने मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए है। आधा दर्जन शिकायतों और जाँच के बाद भी विभाग के अधिकारियो ने भ्रष्ट अफसर पर कार्यवाही के नाम पर चुप्पी साध ली है। शैलेन्द्र पटेल के उपकुलसचिव पद पर नियुक्ति में गड़बड़ी की, स्मार्ट बोर्ड खरीदी में अनियमितता, नोटशीट में कूटरचना सहित आधा दर्जन शिकायते है जिस पर कुछेक की जाँच प्रक्रिया में है तो कुछेक की पूर्ण हो चुकी है। स्मार्ट बोर्ड खरीदी और उपकुलसचिव नियुक्ति में जांच रिपोर्ट में प्रारंभिक तौर पर शिकायत को सही पाया गया है, जाँच अधिकारियो ने महीनो पहले रिपोर्ट संचालनालय में जमा कर दिया है। उसके बाद जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है, उल्टे प्रदेश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय रविशंकर शुक्ल के प्रभारी कुलसचिव की जिम्मेदारी सौप दिया है।
शैलेन्द्र पटेल

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शैलेन्द्र पटेल की उच्च शिक्षा विभाग में साल 2016 में उपकुलसचिव पद पर हुई। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित योग्यताओ को पूर्ण नहीं करने के बाद भी उसका चयन किया गया। वही रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय में साल 2020 में 1 करोड़ रुपये की लागत से ख़रीदे गए स्मार्ट बोर्ड में भर्राशाही की गई, तत्कालीन कुलसचिव और उपकुलसचिव ने कोरोनाकाल में स्मार्ट बोर्ड को भंडार क्रय नियमो का उल्लंघन कर ख़रीदा और कमिशनखोरी की। जाँच पर शिकायतों की पुष्टि की गई। पटेल पर शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में साल 2016 में हुए कथित कंप्यूटर घोटाले में नोटशीट में कूटरचना के आरोप लगे। गंभीर शिकायतों के बाद भी उच्च शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है।

मंत्री का कथित रिश्तेदार-
शैंलेंद्र पटेल को मूलतः रायगढ़ जिले का निवासी बताया जाता है, जो उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल का गृह जिला है। विभागीय सूत्रों के अनुसार शैलेन्द्र पटेल को उच्च शिक्षा मंत्री का कथित तौर पर रिश्तेदार बताया जाता है, जिसके चलते उच्च शिक्षा विभाग के अफसर कार्यवाही का सहस नहीं दिखा पा रहे है। जिसके बाद सवाल जानकर सवाल उठा रहे कि क्या मंत्री के रिश्तेदार को गड़बड़ी और भ्रष्टाचार करने की छूट है? या विभागीय मंत्री के सरंक्षण के चलते विभागीय अफसर चाहकर कार्यवाही नहीं कर पा रहे है ?
किन कारणों से कार्यवाही नहीं हो रहे बताये मंत्री- भाजपा
भ्रष्ट और खटराल किस्म के अफसर पर जाँच के बाद भी कार्यवाही ना होने, कुलसचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर स्थापित रखने से बीजेपी ने मंत्री से जवाब माँगा है। बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि
“उच्च शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है, ट्रांसफर लिस्ट जारी होने के बाद उसमे बदलाव किया जाता है… हर प्रकार के कदाचरण में लिप्त व्यक्ति को बचाने मंत्री जी ने पूरी ताकत झोंक दी है। शासन और संवैधानिक नियमो की धज्जियाँ उड़ाकर मंत्री जी रिश्तेदारी निभा रहे, आखिर क्या कारण है कि जाँच में दोषी पाया जाने के बाद भ्रष्ट अधिकारी पर कार्यवाही नहीं हो रही, उसे उच्च पदों पर बिठाया गया है.. मंत्री को स्पष्ट करना चाहिए। रिश्तेदारी निभाना है तो घर में निभाए, कार्य में भाई भतीजावाद बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।”

अफसरों का जवाब- करेंगे कार्यवाही..
चार महीनो के सघन जाँच के बाद अधिकारियो ने महीने भर पहले जाँच रिपोर्ट जमा किया है, रिपोर्ट का अभी परिक्षण का दौर चल रहा है। जाँच और जाँच रिपोर्ट के परिक्षण के बहाने टालमटोल करते अफसर कार्यवाही को लेकर रटा रटाया जवाब देते है। उच्च शिक्षा आयुक्त शारदा वर्मा ने कहा कि

“जाँच रिपोर्ट आ गई है, उसका परिक्षण करेंगे.. फिर शासन को भेजा जायेगा। शासन स्तर पर कार्यवाही होगी, और ये कब तक होगी मई नहीं बता सकती।”

चार महीने से चल रही जाँच: जिस अधिकारी पर गंभीर आरोप, उसे कुलसचिव का प्रभार.. भ्रष्ट अफसरों पर मेहरबानी कैसी?

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