रायपुर 19 अगस्त 2022. समाज कल्याण विभाग के जरिये समाज का कितना कल्याण हो रहा यह शोध का विषय है लेकिन इस विभाग में पदस्थ अधिकारी कई तरह की गड़बड़ियों को अंजाम देते हुए अपना कल्याण करने के खेल में लगे है। यहाँ के संयुक्त संचालक की शिकायत समाज कल्याण विभाग मंत्री से हुई है। शिकायत में संयुक्त संचालक पंकज वर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ता राकेश अवस्थी ने मंत्री अनिला भेंडिया को शिकायतों पुलिंदा देकर संयुक्त संचालक पर कार्यवाही की मांग की है। शिकायत के अनुसार पंकज वर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी है जो विगत 24 वर्षो से अधिक समय से विभाग में योग्यता नहीं होने के बाद भी जमे हुए है और विभाग को दीमक की तरह चट कर रहे है। पंकज की नियुक्ति एक्यूप्रेशरथेरेपिस्ट के पद पर हुई और तमाम आरोपों के बाद भी तत्कालीन भाजपा सरकार में उच्चाधिकारियों के सरंक्षण में साल दर साल पदोन्नत होकर संयुक्त संचालक बन गए। पंकज के अधिकांश शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी है, पंकज ने इलाहाबाद के जिस इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड रूरल टेक्नोलॉजी कॉलेज से फिजियोथेरेपी का डिप्लोमा अर्जित की वहा एडमिशन लेने के साल भर के भीतर ही छोड़ दिया था। वहा पढाई ही नहीं की और उन्हें डिप्लोमा मिल गया, ऐसे में स्पष्ट होता है कि डिप्लोमा फेक है। फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे वर्षो से विभाग के महत्वपूर्ण पदों में जमे है। पंकज पर भ्रष्टाचार के आरोप है। उसने राज्य स्रोत केंद्र (एनजीओ) खोलकर करोडो की गड़बड़ी की। साल 2019 में सार्वजनिक हुए 1000 करोड के घोटाले में पंकज भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता राकेश के अनुसार पंकज की प्राथमिकता ही धनार्जन रहा है, जिसके लिउए उसने फर्जी बिल से करोडो रुपये की हेर फेर किया है। साल 2012 में हुए एक आयोजन में पंकज शासन के करोडो रुपयों की फिजूलखर्ची की, दस से 15 रुपये के फ्लेक्स को फ्लेक्स 40 रुपये फ़ीट के अनुसार से छपवाया तो एक एक फूल मालाओ को 70 रुपये में ख़रीदा। बुके को सामान्य दर से अधिक 650 रुपये की दर पर ख़रीदा था। इस आयोजन के व्यय में हुए गड़बड़ी की जाँच हुई तो जाँचकर्ता ने पंकज को दोषी ठहराया था। कागजो में एनजीओ बनाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया।
बीजेपी सरकार में मेहरबानी-
चोर दरवाजे से विभाग में घुसे पंकज को समाज कल्याण विभाग का छत्रप माना जाने लगा है। पूर्व की बीजेपी सरकार में उच्चाधिकारियों और विभागीय मंत्रियो सभी पंकज पर मेहरबान थे, जिसका परिणाम है कि अयोग्य होने के बाद भी संयुक्त संचालक बड़ा दिया गया। विभाग में संचालक रहे पर सिक्का पंकज का चलता रहा। वैसी परिस्थितयां कांग्रेस सरकार में भी बनी हुई है। पंकज का मंत्री भेंडिया के बंगले में सीधा दखल बताया जाता है, बताते है कि बंगले में उपयोग वाले दूध से लेकर राशन तक सभी दैनिक सामग्रियों के व्यवस्था की जिम्मेदारी पंकज ने ले रखी है, जिसका लाभ विभाग के गड़बड़ घोटालो को छिपाने में मिलता है।