रायपुर 4 मई 2022. उपकुलसचिव शैलेन्द्र पटेल की नियुक्ति में गड़बड़ी संबंधी शिकायत पर गठित जाँच समिति ने बस्तर विश्वविद्यालय प्रबंधन से दस्तावेज लिया है, जिसके अनुसार शिकायत प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित जाँच समिति को बस्तर विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद पाठक ने बताया कि साल 2016 में शैलेन्द्र पटेल की प्रथम नियुक्ति के दौरान एसपी तिवारी कुलसचिव और एनडीआर चंद्रा कुलपति थे जिन्होंने उसका शैक्षणिक अभिलेखों का सत्यापन किया था, जिसके बाद उसे नियुक्ति दी गई थी। बताते है कि तत्कालीन कुलपति एसपी तिवारी ने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए संविदा में पदस्थ रहे प्राध्यापक को निर्देशित किया था जिसने दस्तावेजों का मिलान कर सत्यापन के लिए कुलसचिव को प्रस्तुत किया था। ऐसे में जाँच समिति ने तत्कालीन संविदा में प्राध्यापक से पूछताछ की जिसमे उसने सत्यापन से इंकार करते हुए मिलान करने की बाते कहा।
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नियुक्ति में गड़बड़ी: जाँच के लिए टीम पहुंची बस्तर विश्वविद्यालय, बढ़ेगी उपकुलसचिव की मुश्किलें
दरअसल तत्कालीन कुलपति चंद्रा और कुलसचिव श्री तिवारी ने दस्तावेजों का सही सत्यापन नहीं किया। नियमतः उन्हें समिति बनाकर नियुक्ति प्रक्रिया करना था पर उन्होंने ऐसा नहीं किया जिसका लाभ शैलेन्द्र पटेल को मिला। उनके सेवानिवृती के बाद परिवीक्षाधीन अवधि समाप्ति के दौरान भी कुलसचिव ने ध्यान नहीं दिया और भरोसे में सब ओके कर दिया जिससे बिना किसी जाँच पड़ताल के प्रोबेशन भी समाप्त हो गया। अब मामला खुलने पर सारी गड़बड़िया परत दर परत खुल रही है। उधर बस्तर विश्वविद्यालय में हुए कंप्यूटर खरीदी घोटाले में शैलेन्द्र द्वारा नोटशीट में छेड़छाड़ की बाते सामने आ रही है।
महीने बीतने को जाँच अधूरी-
स्मार्ट बोर्ड खरीदी में चल रही जाँच अब तक अधूरी है। बीते महीने उच्च शिक्षा आयुक्त ने जाँच रूसा के अपर संचालक पीसी चौबे को जाँच कर सत्ता दिनों के भीतर रिपोर्ट सबमिट करने आदेशित किया था जो अब महीना बीतने को है। बताते है कि जाँच प्रक्रिया में रविशंकर विश्वविद्यालय प्रबंधन जाँच टीम को सहयोग नहीं कर रहा है, जाँच अधिकारी द्वारा मांगे जा रहे खरीदी और भुगतान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराये जा रहे। जाँच समिति द्वारा बार बार रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार से दस्तावेज मांगने के बाद भी दस्तावेज नहीं दिए जा रहे या अधूरे दिए जा रहे है। जिसके चलते जाँच प्रक्रिया अधूरी है। वही जाँच समिति की सुस्ती अलग कहानी बयां कर रही है।
