बीते दिवाली देवव्रत इस दिवाली मनोज मंडावी का निधन, साल भर में दो युवा विधायकों का निधन.. राज्यपाल, सीएम ने जताया शोक

रायपुर 16 अक्टूबर 2022.  विधानसभा उपाध्यक्ष और भानुप्रतापपुर से विधायक मनोज सिंह मंडावी का आज सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया। मंडावी शनिवार रत को कांकेर जिले के अपने पैतृक गाँव नथियाँ नवागांव गए थे। वह उन्होंने बेचैनी की शिकायत की, उन्हें आनन फानन में चारामा के अस्पताल ले जाया गया ,जहाँ डॉक्टरों ने जाँच की और धमतरी रिफर कर दिया, अस्पताल में सुबह 6 बजे उनका निधन हो गया।

58 वर्षीय श्री मंडावी पहली बार वर्ष 1998 में भानुप्रतापुर से विधायक बने , वहां से वे तीन बार विधायक रहे और बस्तर क्षेत्र में कांग्रेस के अहम् आदिवासी चेहरा रहे। साल 2002 से 2003 के जोगी के कार्यकाल में गृह और कामगार मंत्री भी थे। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उन्हें विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया, उनके निधन की खबर से बस्तर क्षेत्र में शोक की लहर है। आज शाम गृह ग्राम नथिया नवागांव में अंतिम संस्कार हुआ। उनके बेटे ने मुखाग्नि दी।
सीएम, स्पीकर अंतिम यात्रा में शामिल हुए-

श्री मंडावी के अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत, आबकारी मंत्री कवासी लखमा, शिव डहरिया,पीसीसी चीफ मोहन मरकाम, मंत्री अनिला भेंडिया, कांग्रेस के मंत्री विधायक कई दिग्गज नेता भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। मनोज मंडावी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिवंगत विधायक मनोज मंडावी को कांधा दिया।

राज्य सरकार ने विधानसभा उपाध्यक्ष के निधन पर एक दिन का राजकीय शोक रायपुर और कांकेर जिले में घोषित किया। राज्यपाल अनुसुइया उइके सहित सभी दिग्गज नेताओ ने शोक जताया है। राज्यपाल ने शोक सन्देश में कहा कि मंडावी अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहे,उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए बड़ी जिम्मेदारी निभाई। उनका निधन प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है।
पिछली दिवाली देवव्रत गुजरे थे, हफ्ते पहले मनोज-
प्रदेश के दो युवा विधायकों का साल भर में निधन हो गया। पिछली दिवाली में जनता कांग्रेस के विधायक देवव्रत सिंघझ का देहांत हुआ था, इस बार दिवाली के हफ्ते भर पहले मनोज मंडावी नहीं रहे। मंडावी पूर्व में अजीत जोगी के करीबी थे, वे कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे। जोगी के सानिध्य में आने के बाद उन्हें भानुप्रतापुर से टिकट मिला और 1998 में पहली बार विधायक बने। 1977 में उनके पिता हरिशंकर ठाकुर कांकेर से जनता पार्टी की टिकट पर विधायक चुने गए थे।

 

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