जमीन का खेल: फर्जी दस्तावेजों से किया गया नामांतरण, तहसीलदार और पटवारी बने बाधक तो हो गया ट्रांसफर, पढ़िए स्वतंत्र बोल की विशेष रिपोर्ट

स्वतंत्र बोल
रायपुर 20 फरवरी 2024.  भूमाफियाओ की नजर सरकारी और निजी जमीनों के साथ मठ, मंदिरो की जमीनों पर है। राजधानी में भूमाफियो ने करोडो की बेशकीमती जमीनों को कब्जाने राजस्व अधिकारियो का फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किया और फिर उसे बेच दिया। भूमाफियाओ ने करोडो की जमीं हथियाने योजनाबद्ध तरीके से दस्तावेजों में कूटरचना कर पेपर तैयार करवाए और बाद में रजिस्ट्री कर खुद खरीद ली।

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दस्तावेजों के अनुसार जैतूसाव मठ अंतर्गत श्रीरामचन्द्र स्वामी गोपीदास मंदिर, हनुमान मंदिर महंत श्री लक्ष्मीनारायण दास की भूमि क्रमाँक 295/5 के भाग को जामगांव निवासी सोनसाय साहू और सोनू साहू पिता बिसराम साहू के नाम फर्जी तरीके नामांतरण किया गया। रिकॉर्ड में छेड़खानी करते हुए तत्कालीन पटवारी रामचंद्र साहू के फर्जी दस्तखत कर बैक डेट 14.04.1982 में प्रमाणीकरण करते हुए नामांतरण कर दिया, और बाद में उक्त भूमि एक बिल्डर को बेच दिया गया। इस पुरे प्रकरण में राजस्व अफसरो की भूमिका भी संदिग्ध है।

ऐसा हुआ खेल-


धरमपुरा की जिस जमीन पर भूमाफियाओ और राजस्व अधिकारियो ने मिलकर खेल किया वह विवादित है। मठ की जमीं को सोनसाय साहू गया फिर किया फिर उसी जमीन को सोनू साहू और सोनसाय साहू ने गायत्री प्रोजेक्ट्स मुकेश शाही को बेच दिया। दरअसल भूमाफियाओ ने सुनियोजित तरीके से मठ की जमीन को हड़पने के उद्देश्य फर्जी पेपर तैयार किया और साल 2023 में रिकॉर्ड में छेड़खानी करते हुए वर्ष 1982 में नामांतरण दिखाया गया। दस्तावेजों में की गई छेड़खानी, तत्कालीन पटवारी रामचंद्र साहू के फर्जी हस्ताक्षर स्पष्ट तौर पर नजर आता है।

राजस्व अफसरो की मिलीभगत-


पूरा लैंड स्केम में राजस्व अफसरों की मिलीभगत से किया गया। दस्तावेजों और रिकॉर्ड में कूटरचना के साथ नामान्तरण किया गया तो रजिस्ट्री के बाद उक्त जमीन भी बढाकर दोगुना कर दिया गया। बताते है कि संशोधन से इंकार करने पर तत्कालीन तहसीलदार और पटवारी को हटाकर उसके स्थान पर दूसरे तहसीलदार और पटवारी को बिठाया गया फिर धड़ल्ले से नामान्तरण और रजिस्ट्री का खेल; हुआ। दरअसल पूर्व में रहे तहसीलदार और पटवारी ने अपना कलम फ़साने से मना कर दिया था, ऐसे में भूमाफियाओ ने जिला प्रशासन के अफसरो से मिलीभगत कर उन अधिकारियो को उस हल्का से अन्यत्र ट्रांसफर कर दिया था। जब यह पूरा खेल हुआ तब कलेक्टर डॉ. सर्वेश भूरे थे। इस प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेज स्वतंत्र बोल के पास मौजूद है।

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मठ की जमीन को सोनू साहू और सोनसाय के नाम नामान्तरण करने पर जैतूसाव मठ के सचिव महेंद्र अग्रवाल ने अनभिज्ञता जताया क़ानूनी कार्यवाही की बाते कही तो रजिस्ट्री कर भूमिस्वामी बने गायत्री प्रोजेक्ट्स के मुकेश शाही ने कुछ भी कहने से बचते रहा।

 

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