जाँच पर जाँच: तीन बार जाँच तीनो में फर्जीवाड़ा की पुष्टि, ना निलंबन ना बर्खास्तगी.. अब होगी विभागीय जाँच

स्वतंत्र बोल
रायपुर 12 मार्च 2024.  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव शैलेन्द्र पटेल के खिलाफ विभिन्न जाँच समितियों की रिपोर्ट के बाद शासन ने विभागीय जाँच संस्थित की है। पूर्व में पटेल के शैक्षणिक और अनुभव संबंधी दस्तावजों की जाँच के लिए अपर और संयुक्त संचालक स्तर की समिति, आयुक्त उच्च शिक्षा की रिपोर्ट और फिर तीन प्राचार्यो की समिति ने जाँच किया था, जिसमे सभी ने उसके अनुभव और शैक्षणिक दस्तावेज को फर्जी पाया। प्राचार्यो की समिति ने सात महीने पहले रिपोर्ट शासन को बंद लिफाफे में जमा किया था जिस पर अब कार्यवाही शुरू हुई है। शासन ने विभागीय जाँच संस्थित की है।


तीन अलग अलग समितियों द्वारा की की गई जाँच में सभी ने शैलेन्द्र पटेल को उपकुलसचिव और कुलसचिव पद हेतु अयोग्य पाया था, उसके बाद भी सात महीनो से रिपोर्ट को विभागीय अफसरों ने दबाये रखा। मंत्रालय उच्च शिक्षा विभाग के कुछ चुनिंदा अफसरो ने शैलेन्द्र पटेल को बचाने जाँच समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक होने नहीं दिया और अब कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।

कागजो का पेट भरने की कवायद-


शैलेन्द्र पटेल को पूर्व की कांग्रेस सरकार और मौजूदा बीजेपी सरकार में दोनों वरदहस्त मिल रहा है। पूर्व में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल के करीबी होने के चलते अफसरो ने जाँच रिपोर्ट दबाये रखा और अब सत्ता परिवर्तन के बाद भी वही स्थिति है। जाँच रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद भी ना तो निलंबित किया गया ना ही हटाया गया, कागजो का पेट भरने विभागीय जाँच संस्थित की गई है। प्रभाशाली पद में रहते के दौरान होने वाली जाँच की स्थिति को समझा जा सकता है।
उच्च शिक्षा सचिव आर प्रसन्ना ने कहा कि

“रिपोर्ट के आधार पर शो-काज नोटिस जारी करने के साथ साथ विभागीय जाँच संस्थित की गई है।”

सुलगते सवाल-
1- प्रारंभिक जाँच में दोषी पाए जाने के बाद भी आखिर निलंबन क्यों नहीं किया गया ?
2- प्रभावशाली पद में रहते क्या विभागीय जाँच प्रभावित नहीं होगी ?
3- विभागीय जाँच की कब तक पूरी होगी ?
4- सात महीने से अधिक समय तक अफसरो ने जाँच प्रतिवेदन दबाये रखा, क्यों ?

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