अंदरूनी खबर: आखिर क्यों आया सीएम भूपेश को गुस्सा, चेतावनी के बाद केंद्रीय एजेंसियों का ऐसा बर्ताव क्यों ?

अंदरूनी खबर
28 नवंबर 2022.
बढ़ेगी टकराहट ?
प्रदेश में केंद्रीय एजेंसियों की चल रही जाँच पड़ताल और पूछताछ के तौर तरीको के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बेहद नाराज है। केंद्रीय एजेंसिया कारोबारियों और अधिकारियो के साथ अपराधियों जैसा सलूक कर रही है, उनके साथ मारपीट करते हुए मुर्गा बनाया जा रहा। मारपीट में किसी का हाथ टूट गया तो किसी के कान का पर्दा फट गया। इसकी शिकायत सीएम भूपेश तक पहुंची तो उन्होंने ईडी और आयकर विभाग को सीधी चेतावनी दी है। इससे पहले भी भिलाई के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री केंद्रीय एंजेसियों को समझाइस दे चुके है, उसके बाद भी ऐसा बर्ताव। सीएम की चेतावनी का मतलब राज्य और केंद्र के बीच टकराहट होगी, वेस्ट बंगाल में ऐसी स्थिति देखने को पहले ही मिल चुकी है, जहाँ स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ में झड़प भी हो चुकी है। सीएम भूपेश के एक के बाद एक लगातार किये छह ट्ववीट से अंदाजा लगाया जा रहा कि आगामी दिनों में बंगाल जैसी स्थिति यहाँ भी हो सकती है।
दोनों हाथो से दस्तखत..
विश्वविद्यालयो में पढाई कम अब राजनीति ज्यादा हो रही है, या कहे की विश्वविद्यालय राजनीति का अड्डा बन गया है। यह किसी विश्वविद्यालय की नहीं प्रदेश व संभावतः देश के सभी विश्वविद्यालयो की है। प्रदेश के एक विश्वविद्यालय के कुलसचिव दोनों हाथो से लिखने में माहिर है, या यूँ कहे की सरस्वती की विशेष कृपा है। साहब दोनों हाथो से दस्तखत करते है। सुनते है कि किसी विवादित फाइलों को निपटाने के दौरान उल्टे हाथो से दस्तखत करते है और साफ़ सुथरे कामो के लिए सीधे हाथो से। शायद इसके पीछे उन्हें लगता होगा कि ऐसा कर वे भविष्य में होने वाले गड़बड़ी, जाँच पड़ताल से बच जायेंगे, पर कुलसचिव का नाम तो वही रहेगा।
मैनेजमेंट का खेल-
उच्च शिक्षा संस्थानों में गड़बड़झाला इतना है कि उन्हें गिनते और उनकी सफाई करना एक व्यक्ति के एक जनम की बात नहीं है। खटराल किस्म के कुलपति अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों और शिकायतों को दबाने के तरह तरह के हथकंडे अपनाते है। एक विश्वविद्यालय के कुलपति की पत्रकारों ने धुर्रा उड़ा दिया, हर दूसरे दिन उनके करतूतों से अखबार भरी रहती थी। बताते है कि साहब ने एक नामी पत्रकार को विश्वविद्यालय आमंत्रित किया और उसका हाई टी में समस्याओ का हल पूछा। पत्रकार ने हल बताया पर अपने परिजनों को लेकर चिंता जताया। कुलपति ने पत्रकार के परिजन को विश्वविद्यालय में मैनेज किया तो पत्रकार भी अपने काम में जुट गए और अगले दिन से खबरे समाचार पत्रों में छपना बंद हो गया। प्रदेश में मैनेजमेंट में माहिर कुलपतियों के ऐसे अनेको की किस्से है।

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