अंदरूनी खबर,
18 नवंबर 2022.
लगे विधायक मुर्दाबाद के नारे-
प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण में हुई कटौती सरकार के गले का फ़ांस बन गई है। इसके विरोध में आदिवासी समाज प्रदेश भर धरना, चक्काजाम कर प्रदर्शन कर रहे है। आरक्षण मसले को सुलझाने राज्य सरकार ने 1 दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया है। उधर एक दिन पहले कोरबा में हुए प्रदर्शन में पाली तानाखार से कांग्रेस के विधायक मोहित केरकट्टा को अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ा। कोरबा में प्रदर्शनरत आदिवासी महासभा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ताओ ने विधायक के सामने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मुर्दाबाद नारो के बीच विधायक को चोर तक कह दिया, जिससे विधायक झेंप गए। मौके की नजाकत को समझते विधायक ने चेहरे पर मुस्कान लिए हुए सबका हाथ जोड़कर कर अभिवादन किया।
अधिकारी को हटाया-
राजधानी की जिला महिला बाल विकास अधिकारी को जिला कार्यालय से हटा दिया गया है, उन्हें ट्रेनिंग सेंटर में अटैच किया गया है। आदेशों के अनुसार ट्रेनिंग सेंटर में कार्य की अधिकता है ऐसे मे डीडब्लूसीडीओ को वहां अटैच कर वहां के अधिकरियो का कार्य दबाव कम करने की कोशिश की गई है। अंदरूनी खबर है कि कुछ दिनों पहले राजधानी का कमान एक महिला अधिकारी से लेकर दूसरे महिला अधिकारी दिया गया था, जिससे पूर्व से पदस्थ महिला अधिकारी नाराज बताई गई। हटाने की शिकायत विभागीय मंत्री से की, जो उनकी रिश्तेदार भी बताई जाती है, लेकिन संबंधो पर शिष्टाचार हावी रहा और आदेशों में संशोधन नहीं हुआ। कार्यालय में दो महिला अफसर होने से विवाद की स्थिति बनी हुई थी, ऐसे में एक को ट्रेनिंग सेंटर भेजकर समाधान निकालने की कोशिश की गई है।
कोई योजना तो नहीं बना रहे..?
महिला बाल विकास विभाग में सब कुछ सही नहीं है। भ्रष्टाचार, अघोषित लूट और सरकारी धन के दोहन के केंद्र बने विभाग में बेलगाम अधिकारियो की करतूतों से मंत्री की फजीहत हो रही है। चाहे वो महासमुंद में अधिकारी के धरने पर बैठने का मामला हो या राजधानी में उपसंचालक की पिटाई, बालिका गृह में नाबालिक से दुष्कर्म या संचालक द्वारा सरकारी बंगले में साज सज्जा का.. सभी मामलों में अधिकारियो ने विभाग की भद पिटवाया है। आश्चर्य तब होता है कि नाबालिक से दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामले से मंत्री को अवगत नहीं कराया जाता और उन्हें मीडिया से जानकारी मिलती है। इतना सब होने के बाद किसी भी कोई अनुशानात्मक कार्यवाही नहीं होती उल्टे प्रमोशन कर दिया जाता है, ऐसे में सवाल उठता है कहा है मंत्री और उनके सिपहसालार ? कही जानबूझकर मंत्री की छवि धूमिल करने अधिकारी कोई योजना तो नहीं बनाई जा रही।
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