अंदरूनी खबर
21 अक्टूबर 2022. लंबे समय के बाद तबादलों से बैन हटा तो सरकारी कर्मियों के साथ अधिकारियो की खुशी का ठिकाना ना था। सरकारी कर्मी अपने लिए महफूज जगहों में जाने प्रयासरत रहे तो संबंधित विभाग के अफसर उचित व्यवहार की तलाश में। 15 अक्टूबर के बाद तबादलों पर मिली छूट की अवधी समाप्त हो चुकी है ऐसे में अब होने वाले तबादले मुख्यमंत्री के समन्वय के बाद होगा। एक अनुमान के मुताबिक़ करीब 4000 से अधिक सरकारी कर्मियों का तबादला हुआ, जिसमे शिक्षा विभाग टॉप पर रहा है।
स्कूल शिक्षा विभाग में अफसरों ने ऐसे तबादले किये कुछ स्कूलों के पुरे शिक्षकों का ट्रांसफर कर दिया, जिससे पूरा स्कूल ही खाली हो गया। बच्चो और परिजनों के हड़ताल बाद व्यवस्था बनाया गया। यही हाल लगभग सभी विभागों का है जहाँ बड़े संख्या में तबादले हुए। तबादलों के लिए सरकारी कर्मियो को उचित कीमत भी चुकानी पड़ी है। तबादलों को लेकर आम तौर पर मंत्री बंगलो में उमड़ने वाली भीड़ इस बार नदारद थी, बताते है कि पूर्व के अनुभवों के बाद मंत्रियो ने हाथ खड़े कर दिए थे, ताकि कार्यकर्ताओ में सम्मान बरकरार रहे। उच्च शिक्षा विभाग में सिर्फ एक सिंगल आदेश असिस्टेंट प्रोफेसर्स का जारी हो सका, उसमे में विवाद हो गया। दरअसल सूची बनाने में लेटलतीफी हुई, बार बार नाम जोड़े और हटाए गए। इसी बीच विभागीय मंत्री गुजरात दौरे पर गए तो अनुमोदन नहीं हो सका, देर से हुए अनुमोदन में के बाद जंबो लिस्ट निकली, उसमे में भी त्रुटियां निकल आई। जारी सूची में किसी भी प्रकार के बदलाव या संशोधन का अधिकार तबादले के लिए बनी कमेटी को था।
नियमानुसार आवेदक अभ्यावेदन कमेटी के समक्ष देता फिर चार से छह सप्ताह में कमेटी परिक्षण कर निर्णय देती पर ऐसा नहीं हुआ। तबादला प्रक्रिया को लेकर शिकायत पहुंचने पर विभागीय सचिव ने अपने स्टेनो की छुट्टी कर दी। महिला बाल विकास विभाग में ऐसा ही कुछ हुआ। बताते है कि व्यक्ति का वजन देख सहयोग की बात की गई। जिसने सहयोग की हामी भरी उसे राजधानी सहित अन्य जगहों में मनमाफिक पोस्टिंग दी गई। जिन्होंने आनाकानी उन्हें ऊपर से सीधे नीचे भेज दिया गया। राग दरबारियों के ये कहते सुने गए कि अब वापसी के लिए जीएसटी भी देना पड़ेगा। जल संसाधन, खाद्य विभाग सहित अन्य विभागों में यही हाल रहा।
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