अंदरूनी खबर
11 दिसंबर 2022.
आदेश से बढ़ा तनाव-
प्रदेश के सेवा सहकारी समितियों में बीते साल भर से चुनाव नहीं हुआ है। कुछ महीनो पहले चुनाव की सुगबुहाट हुई थी पर वोटिंग के कुछ घंटे पहले कोर्ट ने स्टे कर दिया था, लिहाजा चुनाव पर रोक लग गई। चुनाव पर लगी रोक के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के सेवा सहकारी समितियों में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओ को प्राधिकृत अधिकारी बनाया था। जिसकी शिकायत बीजेपी के किसान मोर्चा संगठन ने राज्यपाल से किया था। उधर कोर्ट ने पूर्व में दिए ऑर्डर को बदलते हुए अगले 45 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आदेश राज्य निर्वाचन आयोग को दिया है। इस आदेश के बाद चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओ और बीजेपी कार्यकर्ताओ की बाछे खिल गई है तो प्राधिकृत हुए पदाधिकारियों को तनाव हो गया है। जिला सहकारी बैंक दुर्ग अंतर्गत आने वाले सहकारी समिति के कुछ पदाधिकारियों ने याचिका दाखिल किया था। अब देखना होगा कि आदेश के बाद चुनाव होते है या गाडी ऐसे ही सरपट दौड़ती रहेगी।
समरथ को नहीं दोष गुसाई-
समाज कल्याण विभाग में दिव्यांगों के जारी होने वाले फंड में कुछ अधिकारियो ने गिद्ध दृष्टि जमा रखी है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार करीब 100 करोड़ का झोल किया गया। दस्तावेजों के अनुसार कागजो में काम निपटा अधिकारियो ने अपना पेट भरा है। समाज कल्याण विभाग में एक संयुक्त संचालक को लेकर अनेक शिकायते है पर मजाल कि अफसर के विरुद्ध एक नोटशीट चल पाए। इस विभाग में 1000 करोड़ का घोटाला भी सामने आया जिसमे दर्जन भर सीनियर और रिटायर्ड आईएएस का नाम शामिल है। राज्य सरकार को चूना लगाने और दिव्यांगों का हक़ मारने वाले अफसरों पर फेहरिश्त लंबी है, खटरल किस्म के अफसरों की जानकारी मंत्रालय, विभागीय मंत्री और सीएम सचिवालय तक को है पर ढाक के तीन पात। पूर्व की बीजेपी सरकार में भी इन्ही का जलवा रहा और वर्तमान में भी। ऐसे में अन्य कर्मी कहते फिर रहे समरथ को नहीं दोष गोसाई।
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