अंदरूनी खबर
18 दिसंबर 2022
आरक्षण मुद्दे का समाधान नहीं होने से धीरे धीरे माहौल गरमाता जा रहा है। सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों को लोगो के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। आज गुरु घासीदास जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नारेबाजी का सामना करना पड़ा। नाराज युवाओ ने हंगामा किया और तख्तियां दिखाई गई। उससे कुछ दिन पहले खबर आई कि गुंडरदेही के कोंग्रेसी विधायक कुंवर सिंह निषाद को सतनामी समाज ने आमंत्रित करने के बाद पत्र भेजकर कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का आग्रह किया। ऐसी परिस्थिति पुरे प्रदेश में निर्मित हो गई है, जहा ;लोग पानी नाराजगी जाहिर कर रहे है। विधानसभा के विशेष सत्र के पहले पाली तानाखार के विधायक को आदिवासी समाज के गुस्से का सामना करना पड़ था।
उधर पिछड़ा वर्ग ने राज्यपाल के कार्यक्रम का विरोध करने का फैसला किया है। बीते दिनों उन्होंने राजभवन में ज्ञापन भी सौपा और जल्दी आरक्षण संसोधन विधेयक में दस्तखत करने का संबंधी मांग किया था। पिछड़ा वर्ग जनसँख्या के अनुपात में 42 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहा है। आरक्षण के मुद्दे पर प्रदेश में हर वर्ग की अपनी मांग है। अनुसूचित जाति 16 फीसदी, अनुसूचित जनजाति 32 फीसदी, ईडब्लूएस 10 फीसदी और पिछड़ा वर्ग 42 फीसदी की मांग कर रहा है। प्रदेश में आरक्षण जीरो हो गया है, और जब तक इसका समाधान नहीं हो जाता ऐसे ही रहेगा। आरक्षण रोस्टर के चलते विभिन्न भर्तियां, स्कूलों में प्रवेश और परीक्षाएं रुकी हुई है। जिस तरह राज्यपाल के बयां कुछ दिनों से लगातार बदलते जा रहे उससे अंदेशा तो यही है कि फिलहाल विधेयक ठंडे बस्ते में है, जो अच्छा मेसेज नहीं है। जितनी देरी होगी उतना ही माहौल बिगड़ेगा, जिसका नुकसान सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष को भी होगा।
अंदरूनी ख़बर: अफसर का 100 एकड़ का फार्महाउस.. और महादेव एप की गूंज संसद में।
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