अंदरूनी खबर 17 नवंबर 2022.
गमला प्रेमी संचालक..
एक सरकारी विभाग के संचालक को पेड़ पौधे, फूल और प्रकृति से बेहद लगाव है। हमेशा प्रकृति के करीब रह सके इसके लिए उन्होंने अपने बंगले में शानदार गार्डन बनवा रखा है। जिसमे रंग बिरंगे फूल और पेड़ पौधे लगाए गए है। हमेशा हरा हरा देखने वाले संचालक ने अब अपने घर के लिए कुछ बड़े गमले लेने की योजना बनाई और उसे सप्लाई का जिम्मा विभागीय अफसरो पर डाल दिया। बताते है कि एक-एक गमला करीब दस हजार रुपये का आएगा, तीन गमले मतलब तीस हजार.. इतने में तो एक छोटा गार्डन तैयार हो जाए। अब अधिकारी पसोपेश में है कि भंडार क्रय में निजी उपयोग के लिए गमले खरीदने का प्रावधान नहीं है तो गमले ख़रीदे कैसे.. इसके लिए दिमाग लगाया जा रहा है न। अंदरूनी खबर है कि संचालक को हटाने जाने की सुगबुहाट मंत्रालयीन गलियारों में हो रही है, ऐसे में जाते जाते सब कुछ समेटने की कोशिश है भले ही रायता फ़ैल जाए। कुछ दिनों पहले सरकारी बंगले को रंग-रोगन और साज सज्जा कर नया कलेवर किया गया है जिसके बाद सरकारी बंगाला किसी फाइव स्टार होटल के कमरे जैसा नजर आता है।
संविलियन और प्रतिनियुक्ति का खेल-
सरकारी विभागों में विभागों प्रतिनियुक्ति और संविलियन के नाम पर बड़ा खेल होता आया है। कर्मी मलाईदार और सुख सुविधा वाले विभागों में प्रतिनियुक्ति और संविलियन के लिए लालायित रहते है। हमेशा देखा गया कि कर्मचारीयो में प्रतिनियुक्ति के बाद संविलियन की चाहत बढ़ जाती है। ऐसे ही एक सरकारी विभाग में गृह विभाग के जवान को बड़े साहब ने अटैच कर रखा था। जवान को विभाग का चकाचौंध ऐसा रास कि अब विभाग में संविलियन की जुगत में है। इसके लिए दरखास्त भी दे दिया और फाइल में तेजी से घूम रही है। अब संविलियन होगा या नहीं यह बाद में पता चलेगा पर इसके लिए पसीना बहाया जा रहा है। पूर्व में ऐसे अनेको उदाहरण मिल जायेंगे जिनमे कर्मियों ने दूसरे विभागों में बतौर प्रतिनियुक्ति पहुंचे और वही जम गए। संस्कृति विभाग में उपसंचालक उमेश कुमार मिश्रा पूर्व में शिक्षा विभाग में रहे, प्रतिनियुक्ति पर संस्कृति विभाग पहुंचे और वही जम गए। तत्कालीन के दिग्गज विभागीय मंत्री का साथ मिला तो संविलियन भी हो गया।
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