अंदरूनी खबर, 19 अक्टूबर 2022. प्रदेश में चल रहे ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की छापेमार कार्यवाही से उच्च पदस्थ अधिकारी भयभीत है। इस कार्यवाही के बाद पहली बार सबको हड़काने वालो को चेहरे पर आशंकाओं से भरा डर दिख रहा है। कार्यवाही से एक बात स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में पैसो की कमी नहीं है, यहाँ के 50 फीसदी से अधिक रहवासी भले ही गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करे पर अधिकारियो ने भर भर कर सोना और पैसा बनाया है। ईडी की कार्यवाही से अधिकारियो के जमीन जायदाद की सच्चाई भी बाहर आ रही है जो आम तौर पर नहीं आती। चर्चा है कि एक सीनियर आईपीएस ने उत्तरप्रदेश के एक शहर में सैकड़ो एकड़ जमीन ख़रीदा है। राजधानी सहित तीन शहरों में बड़ी इलेक्ट्रॉनिक शो रूम में हिस्सेदारी और एक बड़े हॉस्पिटल में निवेश किया है।
ईडी की राडार में आये आईएएस ने गरियाबंद और धमतरी जिले में सैकड़ो एकड़ जमीने खरीदी है, दोनों जगहों पर जमीने एक ही नाम के प्रॉपर्टी ब्रोकर ने दिलवाया है बस उपनाम अलग है। माटीपुत्र आईएएस को माटी से बेहद लगाव है ऐसे में उसने प्रदेश के अधिकांश जिलों में जमीने खरीदी है। एक आईएएस ने जांजगीर जिले में कलेक्टर रहते हुए बेमेतरा जिले में फार्महाउस ख़रीदा है। जांजगीर भी डीएमएफ में मामले में समृद्ध माना जाता है, कलेक्टर के तबादले के बाद ही डीएमएफ फंड में गड़बड़ी की जाँच के लिए समिति भी बनाई गई। छापेमार कार्यवाही को लेकर अंदरखाने अनेको चर्चाये है, अगर उनमे भरोसा करे तो रायगढ़, कोरबा और जांजगीर और दुर्ग जिलों में बीते कुछ वर्षो में कलेक्टरी करने सभी अधिकारी ईडी की राडार में है। एक आईएएस ने महासमुंद में करीब 54 एकड़ जमीन ख़रीदा तो राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर ने राजनांदगांव में जमीनों में निवेश किया है। जमीनों की जानकारी रजिस्ट्री होने के चलते बाहर आ जाती है पर सोना और हीरा में निवेश की जानकारी बाहर नहीं आ पाती। ईडी द्वारा ज्वेलरी की जानकारी जुटाने से सराफा बाजार के कारोबारी तनाव में है।
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अंदरूनी खबर- शिकायतकर्ताओं को उलझाने में माहिर अफसर, कार्यालय में बनाई जा रही रणनीति।
