अंदरूनी खबर: रविशंकर में ‘माया’ कृपा, तो बिलासपुर में बवाल …।

अंदरूनी खबर
12 दिसंबर 2022.
नाम के मंत्री …?
उच्च शिक्षा विभाग में सब कुछ ठीक नहीं है। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयो की स्थिति बदरंग हो चुकी है और शिकायतो की फेहरिश्त कुतुबमीनार की लंबाई सी बढ़ती जा रही है। अगर कहे कि उच्च शिक्षित मंत्री का अपने विभाग में पकड़ कमजोर हुआ तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, ऐसे में शिक्षा का स्तर कैसे बढ़ेगा। मंत्री के बनने के बाद कभी भी मंत्री ने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जैसे उनसे उम्मीद की जा रही थी। उच्च शिक्षा संस्थानों के मुखियाओं का बैठक लेकर जानकारी नहीं ली, ना ही कभी किसी विश्वविद्यालय और कॉलेज का निरिक्षण करने पहुंचे। राजधानी के नामी विश्वविद्यालय को उजाड़ करने अपने कथित रिश्तेदार को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है, इससे दोहरा नुकसान हो रहा है। एक तो विश्वविद्यालय में माहौल ख़राब हो रहा तो दूसरा सरकार की छवि भी धूमिल हो रही। दरअसल मंत्री का पूरा ध्यान अपने निर्वाचन क्षेत्र में है, अधिकांश समय वही बीतता है। एक कुशल राजनेता के लिए अच्छी बात हो सकती है की वे मतदाताओं के बीच रहे और उनकी समस्याओ को सुने, निराकरण हो या ना हो। पर अगर किसी बड़े विभाग की जिम्मेदारी कंधे पर हो तो समय समय पर उसकी भी जाँच परख करनी चाहिए। प्रदेश में नामी उच्च शिक्षा संस्थानों के दुर्गति का एक बड़ा कारण विभागीय मंत्री का खरसिया तक सीमित होना भी है। राजधानी के एक बड़े विश्वविद्यालय की साख को बट्टा लगाने, उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने वालो को अघोषित तौर पर खुली छूट दी गई। यही सब मामले चुनावी साल में चौपाल चर्चा का विषय बन सकता है।
न्यायधानी में बवाल-
न्यायधानी के एक विश्वविद्यालय में बवाल मचा हुआ है। ताजा मामला किसी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बताया जाता है। सुनते है कि विश्वविद्यालय को विभिन्न पदों में भर्ती के लिए शासन से स्वीकृति मिली, तो कुलपति ने बिना समय गवाएं नोटशीट दौड़ाने कहा। ऐसे में रजिस्ट्रार ने नियम कानूनों की दुहाई दी तो बिफरे कुलपति ने कुलसचिव की शिकायत कर विभाग में कर दी। दरअसल दोनों के बीच काफी दिनों से अनबन की स्थिति है पूर्व में एक पद पर हुई भर्ती में भी कुलपति पर नौकरी के बदले दुर्ग में जमीन रजिस्ट्री कराने के आरोप लगे थे। नियमो के विपरीत भर्ती की गई थी तब भी राजधानी के कुछ लोगो ने मोर्चा खोला था बाद में सब शांत हो गए। पुराने तरीके को दोहराने की कोशिश हो रही है, जिसमे मामला फंस रहा है।
रविशंकर में ‘माया’ कृपा-
रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ केशरीलाल वर्मा का कार्यकाल मार्च 2023 में समाप्त हो रहा है। राजभवन कार्यालय ने नए कुलपति चयन हेतु नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। वर्तमान राजनितिक माहौल को देखते हुए डॉ वर्मा दूसरे टर्म की कोशिशे में जुट गए है, पर यह इतना आसान नहीं होगा। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय की फजीहत हुई, कुर्सी टेबल बिकने के कगार पर पहुंच गया और गाड़िया जब्ती हो गई। रिश्तेदार की फर्म को लाभांवित करने, विश्वविद्यालय का नैक ग्रेडिंग नहीं कराने जैसे दर्जन भर मसले देर सबेर बाहर आएंगे, प्रतिद्वंदी दस्तावेज जमा कर रहे है। उधर विश्वविद्यालय में माया की चर्चा है। माया के चलते ही जालसाज व्यक्ति को महत्वपूर्व पदों पर बिठाया गया है।

 

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