अंदरूनी खबर: कुलपति चयन में लोकल की बयार, उधर भविष्य के लिए बन रही योजना।

अंदरूनी खबर
21 दिसंबर 2022.
लोकल की बयार –
राजधानी के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में कुलपति चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मौजूदा कुलपति का कार्यकाल मार्च 2023 में समाप्त होगा, ऐसे में राजभवन ने नए कुलपति चयन के लिए समिति गठन कर आवेदन मंगाया है। जिसके साथ ही विश्वविद्यालय में स्थानीय और बाहरी की हवा तेज होने लगी है। एक तरीके से देखा जाये तो मांग जायज भी है, प्रदेश में कुशल और अनुभवी शिक्षाविदों की कमी नहीं है। इससे पहले यही मांग इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में भी उठी थी, स्थानीय कर्मियों ने राजभवन के सामने नारेबाजी कर मोर्चा खोला था। बाद में सरकार के दखल के बाद राजभवन ने स्थानीय प्रोफ़ेसर पर अंतिम मुहर लगाया था।

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दरअसल इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति बनने के लालायित प्रोफेसर्स ने स्थानीय पॉलिटिक्स का सहारा लिया था, और उसमे वे कामयाब भी रहे। वही तरीका यहाँ भी अपनाया जा रहा है। यहाँ भी दर्जन भर से अधिक दावेदार कतार में है, जो विश्वविद्यालय के सर्वोच्च कुर्सी पर बैठने की तमन्ना रखते है। मौजूदा कुलपति डॉ केशरीलाल वर्मा माटीपुत्र है, वे दोबारा ताजपोशी चाहते थे पर उनके कार्यकाल में घटित अप्रिय घटनाओ ने उन्हें दावेदारी करने से रोक रही है। चर्चाओं के अनुसार वे अपनी धर्मपत्नी लाइब्रेरी साइंस विभाग की एचओडी माया वर्मा को उक्त कुर्सी पर लाने लाबिंग कर रहे है, जिसके लिए वे महीनो से दौड़ भाग में जुटे है। हालाँकि डॉ माया वर्मा खुद को ऐसे किसी रेस से दूर बताती है। डॉ वर्मा के कार्यकाल को समझने एक बार विश्वविद्यालय के कुलपति सचिवालय जाकर लोगो को देखना चाहिए जहां आगंतुकों के लिए समुचित बैठने की व्यवस्था तक नहीं है। वही इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति बनने से चुके एक सीनियर प्रोफ़ेसर भी लगे हुए है, उन्हें सीएम का रिश्तेदार बताया जाता है।
सुनील के लिए रास्ता-
महिला बाल विकास विभाग में संविदा नियुक्ति का प्रावधान नहीं है। कुछ दिनों पहले एक सेवानिवृत महिला अधिकारी को संविदा में रखने कोशिश की गई थी, मंत्री बंगले से तेजी से नोटशीट चली थी पर नियमो के आडे आने से फाइल रुक गई। अब एक बार फिर वही फाइल दौड़ने लगी है। बताते है उसके लिए सतनाम को मिठाई खिलाई गई है, तो एक अधिकारी अपने रिटायरमेंट के बाद के लिए योजना बना रहे है। दरअसल विभाग में संविदा नियुक्ति का प्रावधान ही नहीं है पर मिठाई की मिठास का असर है। उधर अधिकारी तीन साल बाद सेवानिवृत हो जायेंगे, ऐसे में भविष्य के लिए अभी से योजनाए बनाई जा रही है।

 

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