अंदरूनी खबर: मुख्यमंत्री कार्यालय में पावती नहीं, तो गबन के आरोपित को मंत्री ने बनाया सहायक।

अंदरूनी खबर, 06 फरवरी 2023.
मुख्यमंत्री कार्यालय में पावती नहीं-
सरकारी कार्यालयों में शिकायत या फरियाद करने पत्र देने पर पावती दी जाती है पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अफसरों ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। कुछ दिनों पहले कुछ लोग राजधानी के सिविल लाइन स्थित प्रार्थना पत्र लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम देने पहुंचे। उन्हें कहा गया कि आवेदन लेंगे पर पावती नहीं देंगे तो उन्होंने ने आपत्ति कि दूर से आये है, बिना पावती पता कैसे चलेगा कि आवेदन जमा हुआ है और उस पर कोई कार्यवाही भी हो रही है? इस पर उन्हें बताया गया कि उच्च अफसरों ने पावती देने पर फिलहाल प्रतिबंध लगाया है, आवेदन पर कार्यवाही होगी और शिकायतकर्ता के घर के उस संबंध में जानकारी भी पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पत्र देने का अपना नियम है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते समूह में लोगो को जाने नहीं दिया जाता, तो 100 मीटर दूर गाडी गेट के बाहर रखवा दी जाती है। निवास कार्यालय में बनी खिडकी से प्रहरी पत्र लेता है तो कार्यालय से कर्मचारी आता है और दोबारा कार्यालय जाकर आवेदन संबंधित सफरों को दिखाकर पावती लेकर आता है तब तक आवेदक बाहर धूप में खड़े रहते या पेड़ो के नीचे बैठने की सलाह दी जाती है। फरियादियो को लेकर राजभवन कुछ सजग है। वहां आवेदकों के बैठने सोफा, पीने को पानी और आवेदन की पावती मिलते तक मनोरंजन के लिए टीवी लगाया गया है। ऐसा कुछ मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हो तो दूर दराज के गाँवो से उम्मीद लिए पहुंचे फरियादियो को तत्काल राहत मिलेगी, शिकायती पत्र में कार्यवाही जो चाहे जो हो।
गबन का आरोपित मंत्री का सहायक-
गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के लिए विख्यात समाज कल्याण विभाग में पदस्थ रहते एक अफसर ने करोडो का गोलमाल किया। सहायक सांख्यिकी अधिकारी रहते करोडो रुपये शासन से गबन किया, शिकायत पर जाँच उपरांत सचिव ने संचालक को संबंधित अफसर पर प्राथमिकी दर्ज करने पत्र लिखा और अगले दो दिन बाद अधिकारी सेवानिवृत हो गया। पत्र जारी होने के चार साल बाद भी उक्त अफसर पर ना तो अपराध पंजीबद्ध किया गया ना ही रिकवरी की गई। सेवानिवृत के बाद एक दिग्गज मंत्री ने शरण दी और तब से अब तक अघोषित सहायक के रूप में कामकाज संभाल रहा है। बताते है पद में रहते अधिकारी का खूब जलवा था, जिसके चलते संचालको ने अब तक एफआईआर नहीं कराया। समाज कल्याण विभाग में रूचि रखने वालो ने दस्तावेज जमा किया है। कागज की नाव धीरे चलती है पर बड़े बड़ो को डूबा देती है।

 

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