चार महीने से चल रही जाँच: जिस अधिकारी पर गंभीर आरोप, उसे कुलसचिव का प्रभार.. भ्रष्ट अफसरों पर मेहरबानी कैसी?

0 गंभीर आरोपों के बाद भी पद से हटाने की बजाये लाभान्वित किया 
0 उच्च शिक्षा मंत्री की छवि हो रही धूमिल
रायपुर 25 अगस्त 2022.  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव शैलेन्द्र पटेल की नियुक्ति में गड़बड़ी संबंधी जाँच चार महीने बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। उच्च शिक्षा विभाग ने जाँच समिति से15 दिनों के भीतर जाँच प्रतिवेदन माँगा था पर चार महीने बाद भी जाँच अधिकारी जवाब तलब ही कर रहे है।

विशेष: उच्च शिक्षा विभाग में खटराल किस्म के अफसरो की मौज !

उच्च शिक्षा विभाग ने गड़बड़ी की शिकायत के बाद जाँच के लिए अपर संचालक सीएल देवांगन और डीएस जगत की दो सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया था। समिति ने जाँच की शुरुआत बस्तर विश्वविद्यालय से की, जहा शैलेन्द्र पटेल की पहली पोस्टिंग हुई थी। वहा से समिति ने पोस्टिंग संबंधी दस्तावेज बरामद किये थे। जाँच अधिकारी ने शैलेन्द्र पटेल द्वारा जिन संस्थाओ में अध्यापन कराया गया वहा से जानकारी मांगी, पटेल ने बिलासपुर के सीवी रमन यूनिवर्सिटी से पीएचडी करना बताया, ऐसे में सीवी रमन यूनिवर्सिटी प्रबंधन से जानकारी मांगी गई। शिकायतकर्ता के बयान के बाद शैलेन्द्र पटेल को जाँच के लिए महीने भर पहले बुलाया गया था पर पटेल नहीं पहुंचा ना ही कोई जानकारी दी है। ऐसे में जाँच अधिकारी एक पक्षीय कार्यवाही के पूर्व दूसरा और अंतिम पत्र भेजकर जवाब सकते है। जाँच अधिकारी सीएल देवांगन ने जाँच अब तक अपूर्ण होने पर कहा कि
“जाँच में विलंब हुआ है, अभी अधिकारी कर्मचारियों का हड़ताल है तो और देरी हो रही है। शैलेन्द्र पटेल को जवाब देने महीने भर पहले पत्र जारी किया गया था, पर ना तो जवाब आया ना ही पटेल खुद उपस्थित हुआ। जल्द ही जाँच पूरी हो जाएगी”

जिस पर कई गंभीर आरोप, चल रही जाँच.. उसे बना दिया कुलसचिव!

उपकुलसचिव शैलेन्द्र पटेल

उच्च शिक्षा विभाग के अफसर गडबडझाले में अव्वल कर्मियों पर मेहरबान है। शैलेन्द्र पटेल पर कई गंभीर आरोप है, बस्तर विश्वविद्यालय में पदस्थापना के दौरान नोटशीट में कूटरचना करने, रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्मार्ट बोर्ड खरीदी में अनियमितता, रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कर्मियों को डिमोट करने संबंधी कई गंभीर आरोप है। पटेल के साल 2014 में उपकुलसचिव नियुक्ति में गड़बड़ी हुई है, निर्धारित योग्यता नहीं होने के बाद भी नियुक्ति दी गई है। जिसकी जाँच उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा की जा रही उसके बाद भी उसे रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में कुलसचिव का प्रभार दिया गया है, जबकि उसे महत्वपूर्ण और प्रभावित करने वाले पदों से अलग करना था। बताते है कि पटेल को विश्वविद्यालय का प्रभारी कुलसचिव बनाने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ केएल वर्मा जुटे थे। वे नहीं चाहते की उनके कार्यकाल पूर्ण होने तक किसी अन्य को कुलसचिव नियुक्त किया जाए, ऐसे में डॉ वर्मा ने गिरीशकांत पांडेय के हटने के तुरंत बाद पटेल को प्रभारी कुलसचिव बना दिया। दूसरा शैलेन्द्र पटेल स्वयं को को उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल का करीबी बताकर माइलेज लिया जा रहा है, ऐसे में मंत्री उमेश पटेल को संज्ञान लेना चाहिए। दरअसल इस पुरे मामले से उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल अनभिज्ञ बताये जाते है पर आम तौर पर यह संभव नहीं है। गड़बड़ी के दोषी अधिकारी को कुलसचिव बनाये जाने के सवाल पर उच्च शिक्षा आयुक्त आईएएस शारदा वर्मा ने कहा कि

“कुलसचिव और कुलपति की नियुक्ति शासन स्तर पर होती है, पटेल को प्रभारी कुलसचिव बनाने के संबंध में मै कुछ भी नहीं बता सकती। “

जाँच में खुल रही परते: तत्कालीन रजिस्ट्रार की मेहरबानी का मिला लाभ, दस्तावेजों का नहीं हुआ सत्यापन.. उधर स्मार्ट बोर्ड खरीदी की जाँच महीने भर बाद भी अधूरी

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