‘भ्रष्टाचार की दीवार’ की जाँच के लिए बनी समिति, निगम ने टेंडर किया रद्द.. बैकफुट पर नगर निगम प्रशासन।

रायपुर 9 नवंबर 2022.  राजधानी के तेलीबांधा से वीआईपी तिराहे तक बने कथित ‘भ्रष्टाचार की दीवार’ में मचे बवाल के बाद नगर निगम प्रशासन डेमेज कण्ट्रोल में जुट गया है। निगम प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर जाँच समिति गठित किया है जो सात दिनों में रिपोर्ट देगी। नगर निगम रायपुर के जोन क्रमांक दस में तेलीबांधा थाना चौक से वीआईपी रोड तिराहे तक बने डिवाइडर में हुए सौदर्यीकरण को लेकर बावला मचा हुआ है। बिना टेंडर प्रक्रिया के अज्ञात ठेकेदार द्वारा सौदर्यीकरण कर दिया गया है, जिसके लिए आज से निविदा प्रक्रिया शुरू होना था। शिकायतों के बाद निगम प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है।

 

किसने किया काम, निगम को जानकारी नहीं-
मुख्य मार्ग में बने डिवाइडर में बीते महीने भर से सौदर्यीकरण का काम जारी है, जिसमे 80 फीसदी से अधिक काम पूर्ण हो चूका है। डिवाइडर में गमला, प्लांट्स, सुंदर कलाकृति लगाया गया है, पर नगर निगम प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है। उक्त कार्य नगर निगम जोन दस अंतर्गत हो रहा है और जोन कमिश्नर को जानकारी ही नहीं की सौदर्यीकरण का काम कौन कर रहा? किस ठेकेदार को काम दिया गया है ? बीते दिनों महापौर ऐजाज ढेबर पार्षद आकाश तिवारी के साथ उक्त सौदर्यीकरण का निरिक्षण करने पहुंचे थे संभवतः उन्होंने भी जानने की कोशिश नहीं की काम कौन करा रहा है।
 बैकफुट पर निगम-
अज्ञात ठेकेदार द्वारा बिना टेंडर प्रक्रिया के दीवार बनाये जाने पर सांसद सुनील सोनी ने मामले का पर्दाफास किया। सोनी ने गड़बड़ी का खुला आरोप लगाया तो रायपुर जिला बीजेपी कार्यकर्ताओ ने उसे भ्रष्टाचार की दीवार घोषित कर दिया। बीजेपी ने डिवाइडर के सामने प्रदर्शन कर घोटाले और व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का आरोप ;लगाया। बीजेपी के प्रदर्शन और फजीहत के बाद निगम प्रशासन ने आनन् फानन में टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर जाँच समिति बनाया है। जाँच समिति में नगर निगम रायपुर के मुख्य अभियंता आरके चौबे, संयुक्त संचालक वित्त एसपी साहू और अधीक्षण अभियंता हेमंत शर्मा शामिल है, पर जाँच के बिंदु अस्पष्ट है।

 

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