नई दिल्ली 10 सितम्बर 2022: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एप स्टोर पर मौजूद अवैध लोन एप पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आरबीआई इंस्टेंट फाइनांस एप की एक व्हाइट लिस्ट तैयार करेगा, जिसे इन ऑनलाइन स्टोरफ्रंट पर होस्ट करने की अनुमति होगी।
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एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि आरबीआई लिस्ट तैयार करेगा और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा कि केवल उन्हीं एप को एप स्टोर पर होस्ट किया जाए। आरबीआई ने इस अभ्यास को शुरू करने का फैसला तब किया जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में अवैध लोन एप्स के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की, जो विशेष रूप से कमजोर और लो इनकम ग्रुप के लोगों के लिए लोन/माइक्रो क्रेडिट की पेशकश करते हैं।
फिर राशि की वसूली के लिए डराने- धमकाने वाले हथकंडे अपनाते हैं। एक बैठक में उन्होंने इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों को लेकर चिंता जताई जिनमें खासकर निम्न आय वर्ग के लोगों को अत्यधिक ऊंची दरों पर कर्ज दिए जाते हैं और ग्राहक पर ऐसे खर्च डाल दिए जाते हैं जिनकी जानकारी ग्राहक से छिपाई गई होती है।
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एप आधारित ऋण कारोबार में गड़बड़ी करने वाले ज्यादातर एप्स का संबंध चीन के लोगों से है। सीतारमण ने मनी लांड्रिंग, टैक्स चोरी, डाटा के उल्लंघन/प्राइवेसी और रैगुलेटेड पेमेंट एग्रीगेटर्स, शेल कंपनियों, निष्क्रिय एनबीएफसी आदि के दुरुपयोग की संभावना की भी बात कही थी।
इस व्हाइट लिस्ट को तैयार करने के लिए रिजर्व बैंक म्यूल/रैंटेड अकाउंट की निगरानी करेगा जिनका उपयोग मनी लांड्रिंग के लिए किया जा सकता है, उनके दुरुपयोग से बचने के लिए निष्क्रिय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लाइसेंसों की समीक्षा/रद कर सकते हैं, एक समय के भीतर पेमेंट एग्रीगेटर्स का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कर सकते हैं और समय- सीमा के बाद अनरजिस्टर्ड एग्रीगेटर्स को ब्लॉक कर सकते हैं। सरकारी सूत्रों ने कहा कि आरबीआई के प्रयासों में सहायता के लिए कार्पोरेट मामलों का मंत्रालय शैल कंपनियों की पहचान करेगा और उनकी रजिस्ट्रेशन रद करेगा।
