राहुल गोस्वामी@ स्वतंत्र बोल
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महिला और बच्चो के लिए काम करने वाले महिला बाल विकास विभाग का बुरा हाल है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित होने वाली योजनाए कागजो का पेट भर रही और वास्तविकता उसके उलट है। योजनाओ में कमीशनखोरी और भ्रस्टाचार चरम पर है। विभागीय मंत्री अनिला भेंडिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विश्वास में खरी नहीं उतर पाई। पौने चार साल में मंत्री भेंडिया ने ऐसा कोई काम नहीं कर पाई जो महिला और बच्चो के लिए हितकारी हो।
सरकारी योजनाओ में भ्रष्टाचार चौगुने रफ़्तार से पनपा है। विभाग की ऐसी एक भी योजनाए नहीं है जिसमे खुले तौर पर गड़बड़ी और अनियमितता की शिकायत ना हो। प्रदेश भर में मुख्यमंत्री निर्धन कन्या विवाह में जमकर धांधली और गड़बड़ी की खबरे अखबारों की सुर्खिया बनती रही है, साल भर पहले महासमुंद के अधिकारी को गड़बड़ियों पर कार्यवाही न होने पर धरना देना पड़ा था। आंगनबाड़ी में केन्द्रो में होने वाली कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं की भर्ती में अनियमितता सामने है। पर्यवेक्षकों के 200 पदों पर हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी की गई, चयन सूची को संचालक ने बदल दिया और पदस्थापना ही बदला दिया गया। रेडी टू ईट में मनमानी से महिलाओ में नाराजगी है। रेडी टू ईट में महिलाओ के साथ धोखा हुआ, साढ़े 13 रुपये बताकर 1 रुपये किलो की हिसाब से भुगतान किया जा रहा.. आलम ये है कि सहायता समूह की महिलाये काम करने को तैयार नहीं है जिसका परिणाम है कि रेडी टू ईट फ़ूड पैकेट हितग्राहियो तक निर्धारित समय पर नहीं पहुंच रहा है। आंगनबाड़ी कर्मी और सहायिकाओं की लिए खरीदी गई साड़ी में बड़ा झोल किया गया, उन्हें पारदर्शी दिया गया। नशामुक्ति का नारा बुलंद करने वाली मंत्री ने अपने गृह जिले में शराब दूकान का किराया उठा रही है। पदोन्नति, नियुक्ति और पोस्टिंग में खुले तौर पर पैसे का खेल चल रहा है। अपात्रो को पैसे के दम पर पात्र बनाकर पदोन्नत किया जा रहा। विभाग में बाहरी व्यक्तियों का दखल निरकुंशता का एक बड़ा कारण है। दरअसल मंत्री भेंडिया ने दो व्यक्तियों को अघोषित तौर पर विभाग का सारा काम सौप दिया जो स्थापना और खरीदी, सप्लाई का काम देख रहे है। ऐसे में भ्रटाचार सुरसा की तरह दिनो-दिन मुँह खोल रही है। बीते वर्ष कैबिनेट की फेरबदल की चर्चाओं के बीच मंत्री भेंडिया को रिप्लेस करने चर्चा सत्ता के गलियारों में थी, एक बार फिर वैसी ही परिस्थितिया निर्मित हो रही है। अगर मंत्री भेंडिया को रिप्लेस किया जाता है तो उसका कारण भी यही सब होगा। विभाग में जारी गड़बड़ियों, मनमानी और अनियमितता पर मंत्री मौन है, उनसे जवाब लेने बंगला परिक्रमा करने के बाद भी जवाब नहीं मिलता।
