बिलासपुर 13 अप्रैल 2022. सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय में असिटेंट प्रोफ़ेसर की नियुक्ति को लेकर विवाद को गया है। तल्खी ऐसी की कुलपति और कुलसचिव चिट्टी में बात कर रहे है। पूरा मसला नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उपजा है। विश्वविद्यालय के कुलपति पर आरोप है कि उन्होंने नियुक्ति में रोस्टर प्रक्रिया का पालन नहीं किया और नियमो के विपरीत तीन सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति कर दी।
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जानकारी अनुसार सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में दिसंबर 2021 में सहायक प्राध्यापकों के तीन पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था जिसमे एक पद सामान्य वर्ग, दूसरा अनुसूचित जनजाति और तीसरा पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था। विज्ञापन में नियमो की अवहेलना की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने जारी विज्ञापन को संशोधित कर किया।
13 दिनों में दावा आपत्ति और नियुक्ति-
विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा की नियुक्ति प्रक्रिया में की जल्दबाजी गड़बड़ी को बयां कर रही है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने शिकायतों के बीच आनन फानन में सिर्फ 13 दिनों के भीतर दावा आपत्ति, इंटरव्यू और कार्यपरिषद से अप्रूवल लिया है,, जिसके बाद से प्रबंधन संदेह के दायरे में है। दस्तावेजों के अनुसार सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय प्रबंधन ने तीन पदों के लिए 17 मार्च 2021 में ऑनलाइन दावा आपत्ति मंगाया, इसके लिए प्रबंधन सिर्फ तीन दिन दिए। दावा आपत्ति का निराकरण हुए बिना ही 25 से 27 मार्च के बीच इंटरव्यू लेकर 29 मार्च को कार्यपरिषद् की बैठक में संबंधितो का लिफाफा खोल दिया। इनमे वर्षानाथ, मोरध्वज त्रिपाठी और प्रवीण टोप्पो का चयन हुआ है।
कुलसचिव और कुलपति भिड़े-
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की नियुक्ति को लेकर उपजे विवाद में विश्वविद्यालय के जिम्मेदार आपस उलझ बैठे। बताते है कि मीडिया में खबरे सार्वजनिक होने पर कुलपति ने कुलसचिव डॉ इंदु अनंत को नोटिस भेजकर जवाब भी माँगा था। उधर अजाक्स के प्रांताध्यक्ष डॉ लक्ष्मण भारती ने नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी के लिए कुलपति डॉ. सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए हटाने की मांग की है। उन्होने इसकी शिकायत राज्यपाल अनुसुइया उइके से की है।
गड़बड़ी के आरोपो पर कुलपति डॉ. वंशगोपाल सिंह ने swatantrabol से कहा कि
“नियमो के अनुसार ही नियुक्ति की है, बेवजह इसे तूल दिया जा रहा है।”
वही कुलसचिव डॉ इंदु अनंत ने कहा कि
“मीडिया में छपे बयानों को लेकर मुझसे जवाब माँगा गया था, मैंने जवाब दे दिया है। नियुक्ति पर शासन जाने।”
