पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 32वीं पुण्यतिथि, राहुल गाँधी ने अर्पित की श्रद्धांजलि और हुए भावुक

नई दिल्ली 21 मई 2023: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 32वीं पुण्यतिथि पर सोनिया, राहुल, प्रियंका और मल्लिकार्जुन खड़गे ने वीर भूमि जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 32 साल पहले 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की जान चली गई थी। राहुल गांधी अपने पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए आज श्रीपेरंबदूर भी जाएंगे। राहुल गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करके पिता को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा- ‘पापा, आप मेरे साथ ही हैं, एक प्रेरणा के रूप में, यादों में, सदा!’ इस वीडियो में बताया गया है कि राजीव गांधी ने देश में विकास में क्या-क्या योगदान दिया। इस वीडियो में उनके शपथ ग्रहण समारोह की तस्वीरों से लेकर प्रधानमंत्री रहते हुए देश को लेकर उनकी सोच और उनकी कार्य-शैली की झलक दिखाई गई है।श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की याद में बनाया गया है मेमोरियल

श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की याद में एक मेमोरियल बनाया गया है। पिछले साल भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत करने से पहले भी राहुल पिता के स्मारक पर गए थे। कांग्रेस हर साल 21 मई को राजीव गांधी के शहादत दिवस के रूप में मनाती है। देशभर में ब्लड डोनेशन कैंप और दूसरे इवेंट्स का आयोजन किया जाता है। एमके स्टालिन से मुलाकात कर सकते हैं राजीव गांधी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल के साथ कई दूसरे कांग्रेस नेता भी श्रीपेरंबदूर जा सकते हैं। राहुल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कांग्रेस नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं।

तमिलनाडु कांग्रेस के वर्किंग प्रेसिडेंट एमके विष्णु प्रसाद ने कहा कि 21 मई हमारी पार्टी के लिए बहुत भावनात्मक दिन होता है। इस दिन राहुल गांधी के तमिलनाडु आने से पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राहुल की भारत जोड़ो यात्रा का राज्य के लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ा है। LTTE ने करवाई थी तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या राजीव गांधी चुनाव प्रचार के लिए श्रीपेरंबदूर गए थे। इस दौरान एक कार्यक्रम में LTTE की महिला आतंकी धनु माला पहनाने के बहाने उनके पास पहुंची। उसने राजीव के पैर छूए और कमर पर बंधे विस्फोटकों में ब्लास्ट कर दिया। धमाके में राजीव और हमलावर धनु समेत 16 लोगों की मौत हो गई थी। दरअसल, 1987 में LTTE लड़ाकों से मुकाबले के लिए राजीव गांधी ने श्रीलंका में पीस कीपिंग फोर्स भेजी थी। ये फोर्स मार्च 1990 तक श्रीलंका में रही। LTTE ने इसका बदला लेने के लिए राजीव पर आत्मघाती हमला करवाया।

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