खबर का असर: उमा तिवारी सहित राजस्व अधिकारियो पर होगी एफआईआर, स्वतंत्र बोल के खुलासे के बाद मचा हड़कंप..

स्वतंत्र बोल
रायपुर 13 मार्च 2024.  जैतूसाव मठ के मुआवजा में गड़बड़ी करने वाले राजस्व अफसरों और फर्जी दावेदार उमा तिवारी पर जल्द ही पुलिस अपराध दर्ज करेगी। राजस्व अधिकारियो और उमा तिवारी पति केदार तिवारी ने फर्जीवाड़ा कर ट्रस्ट के मुआवजे राशि में घोटाला किया है। पूर्व में मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष और सचिव ने कलेक्टर और एसपी से मिलकार अपराध दर्ज करने ज्ञापन सौपा था, जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार जल्द ही सभी घोटालेबाजो पर अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। इस पूरे घोटाले को स्वतंत्र बोल ने सार्वजनिक किया है, जिसके बाद जैतूसाव मठ प्रबंधन में भी हड़कंप मचा हुआ है।

जमीन के पेपर तिवारी के पास कैसे ?
स्वतंत्र बोल की पड़ताल में पूरे मामले की परते खुलने लगी है, जिसके बाद गड़बड़ी करने वाले उमा तिवारी पति केदार तिवारी सहित राजस्व अफसरों की सांसे फूलने लगी है। स्वतंत्र बोल की पड़ताल में नई जानकारी सामने आई कि आखिर उमा तिवारी के पास उक्त जमीन दस्तावेज कैसे पहुंचे ? दरअसल पंडित स्व.विशम्भर नाथ पांडेय राजधानी के रामचंद्र स्वामी संस्कृत पाठशाला में पढ़ाते थे। 80 के दशक में जैतूसाव मठ प्रबंधन से श्री पांडेय ने जमीन खरीदा था। दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1982 में श्री पांडेय की मृत्यु होने के बाद वर्ष 1986 मे उमा तिवारी ने स्वयं को श्री पांडेय की बेटी बताकर जमीन हथियाने फौत उठाने एसडीएम कार्यालय में आवेदन किया था। जिसे तत्कालीन एसडीएम ने निरस्त कर दिया था। मुआवजा वितरण के ठीक कुछ महीने पहले राजस्व अधिकारी निर्भय साहू ने उमा तिवारी को स्वर्गीय पांडेय की बेटी स्वीकारते हुए आदेशित कर दिया और मुआवजा की राशि दो करोड़ तेरह लाख रुपये जारी कर दिया। संस्कृत पाठशाला के अध्यक्ष पूर्व विधायक सत्यनारायण शर्मा और सचिव अजय तिवारी है, अब सवाल उठता है कि उमा तिवारी पति केदार तिवारी के पास उक्त जमीन के दस्तावेज कहा से आये?

उमा तिवारी हमारी रिश्तेदार नहीं-
स्वर्गीय विशम्भर नाथ पांडेय के चार संताने थी। तीन बेटे और एक बेटी.. अधिकांश का स्वर्गवास हो चुका है। स्वर्गीय पांडेय के पोते ने कलेक्टर में शपथ देकर कहा कि उमा तिवारी नामक उनकी ना तो कोई बुआ है ना ही रिश्तेदार..। जिसके बाद उमा तिवारी पर धोखाधड़ी और जालसाजी अंतर्गत अपराध दर्ज होगा।

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