जशपुर 13 दिसंबर 2022: छत्तीसगढ़ में एक हाथी के शावक की मौत हो गई है। वह 15 दिन पहले गड्ढे में गिरकर घायल हुआ था। जिसके बाद से उसका इलाज चल रहा था। बताया गया कि उसके 2 पैरों ने काम करना बिल्कुल बंद कर दिया था। यही वजह रही कि आखिरकार सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। घायल शावक को कांसाबेल वन परिक्षेत्र की नर्सरी में इलाज के लिए लाया गया था। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने इस घायल हाथी का लगातार उपचार किया। मगर उसकी जान नहीं बच सकी। अब मंगलवार को शावक का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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इस मामले में वन मंडल अधिकारी जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि एक 15 दिन पहले कुनकुरी के जंगल में यह शावक घायल अवस्था में मिला था। घायल शावक को कांसाबेल नर्सरी में शिफ्ट किया गया था। चिकित्सकों के अनुसार इस हाथी के शवक के पिछले पैर काम नहीं कर रहे थे। पशु विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. पीके चंदन ने बताया कि पता चला था कि नाले के पास फिसल कर शावक नीचे गिर गया था। जिसे रेस्क्यू कर कांसाबेल लाया गया था। पूरी टीम के द्वारा घायल हाथी का इलाज किया जा रहा था, लेकिन शावक के पिछले दोनों पैर पैरालिसिस हो चुके थे जिस कारण उसे ठीक कर पाना संभव नहीं था फिर भी प्रयास किया जा रहा था। आखिरकार उसकी मौत हो गई है।
नितिन सिंघवी ने उठाए सवाल
जशपुर वन मंडल में एक महीने में दूसरे हाथी की मौत हुई है। इससे पहले कांसाबेल के समीप बिजली करेंट की चपेट में आकर एक हाथी की दर्दनाक मौत हो गई थी। हाथी के शावक की मौत के बाद रायपुर के वन्य संरक्षण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने कहा कि रीढ़ की हड्डी टूटे और दोनों पावों में लकवा ग्रस्त हाथी शावक की आज मौत हो गई। उन्होंने कहा कि वन वन विभाग ने इस बात की जानकारी किसी को नहीं दी। ऐसा क्या जादुई इलाज करा रहे थे कि मीडिया को नहीं जाने दिया गया। इसका जवाब वन विभाग को देना चाहिए।
सिंघवी ने कहा कि एक चीज समझ में नहीं आई कि जब रीढ़ की हड्डी टूट गई थी, दोनों पांव में लकवा मार दिया था और जब वन विभाग को भी मालूम था कि वह जिंदा नहीं रह सकेगा तो उसका इलाज क्यों करवाते रहे। क्यों इतनी दर्दनाक मृत्यु दी गई। क्या दर्दनाक मृत्यु देना मानवता है। सात दिन पहले दया मृत्यु के लिए लिखे गए पत्र का संज्ञान क्यों नहीं लिया गया।
सैकड़ों बोरी में भरे धान खा गए हाथी, गेहूं और चना की फसलों को भी पहुंचा रहे नुकसान
