रायपुर 29 मार्च 2022. जल जीवन मिशन में मानव संसाधन नियुक्ति के टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की जाँच पर सुनवाई तीसरी बार आगे बढ़ गई। पूर्व निर्धारित समय पर जल जीवन मिशन के जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे, अब अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
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जल जीवन मिशन में मानव संसाधन नियुक्ति के टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई है। जिसकी शिकायत मुख्य सचिव अमिताभ जैन से होने पर सीएस ने विभागीय सचिव को जाँच का निर्देश दिया था। विभागीय सचिव धनंजय देवांगन ने सुनवाई के लिए शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारियो को संबंधित दस्तावेजों के साथ बुलाया, पर जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे। अतिरिक्त संचालक अजय कुमार साहू महिला आयोग में पेशी होने की जानकारी दी और नहीं पहुंचे। उनके नहीं आने से अन्य जिम्मेदार अधिकारी संयुक्त संचालक गाँधी भारद्वाज, अधीक्षण अभियंता अतुल माल्वे और कार्यपालन अभियंता भी नहीं पहुंचे। निर्धारित समय पर सुनवाई नहीं होने से शिकायतकर्ता ने नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद सचिव श्री देवांगन ने अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की है।
तारीख पर तारीख..
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत जल जीवन मिशन के जिम्मेदार अधिकारियो से हुई थी पर कार्यवाही सिफर रही। शिकायत मुख्य सचिव अमिताभ जैन तक पहुंची तो जाँच शुरू हुई। विभागीय सचिव ने जाँच की सुनवाई के लिए 29 जनवरी को शिकायतकर्ता को दस्तावेजों के साथ बुलाया। उस दिन सचिव ने सुनवाई यह कहकर स्थगित कर दी गई कि जिम्मेदार अफसरों को भी बुलाया जाना था पर लापरवाही के चलते नहीं बुलाया जा सका। तब सचिव ने 15 मार्च को सुनवाई तय किया, जिसे एक दिन पहले विधानसभा की कार्यवाही का हवाला देते हुए स्थगित कर 29 मार्च को सुनवाई तय की गई। जब सुनवाई के लिए शिकायतकर्ता पहुचे तो अधिकारी महिला आयोग में पेशी के बहाने नहीं पहुंचे। जिस पर एक बार फिर सुनवाई आगे बढ़ाकर 6 अप्रैल की तय की गई। अतिरिक्त मिशन संचालक अजय कुमार साहू चाहते तो अपने अधीनस्थ अधिकारी को भेज सकते थे पर वे न तो स्वयं पहुंचे ना ही उनके अधीनस्थ अधिकारी। आखिर सुनवाई से अधिकारी बच क्यों रहे है?
उधर महिला आयोग ने लगाई फटकार-
जेजे मिशन में नियुक्ति संबंधी प्रकरण में महिला आयोग ने ने अतिरिक्त मिशन संचालक अजय साहू, कॉल मी सर्विसेस कंपनी के संचालक राजकुमार बोथरा सहित चार अन्य अफसरों की खबर ली। आयोग ने महिला को कार्यमुक्त करने पर उतना ही जिम्मेदार कंपनी के संचालक और अधिकारियो को ठहराया जितना शिकायतकर्ता महिला को। आयोग ने कंपनी के संचालक को शिकायतकर्ता युवती को दो महीने का वेतन देने का निर्देश दिया।
