रायपुर 9 नवंबर 2022. बालिका गृह में नाबालिक से दुष्कर्म को लेकर प्रतिदिन नए तथ्य सामने आ रहे है। आरोपित के डीएनए मिसमैच की जानकारी विभागीय मंत्री और अध्यक्ष बाल सरंक्षण आयोग को नहीं था, मीडिया में मामला फूटने के बाद महिला बाल विकास मंत्री अनिला भेंडिया और अध्यक्ष बाल सरंक्षण आयोग को जानकारी हुई।पिछले वर्ष घटित इस घटना की डीएनए रिपोर्ट फरवरी 2022 में आई, जिसे विभागीय अफसरों ने अब तक दबाये रखा। इसकी जानकारी विभागीय अफसरों ने विभागीय मंत्री और उच्चाधिकारियों को नहीं दी।
विभागीय जानकारीनुसार विगत वर्ष प्रकरण के सामने आने पर महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालनालय और जिला स्तर पर जाँच समिति गठित कर जाँच कराई गई थी। जाँच में प्रेम प्रसंग जैसे तथ्य सामने आने के बाद अधिकारियो ने गंभीरता ना दिखते हुए मामले को बंद कर ठन्डे बस्ते में डाल दिया था। भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा की जाँच में खानापूर्ति करने वाले अफसरों ने महिला अपराधों पर भी सिर्फ खानापूर्ति की। उक्त घटना के दौरान उक्त जिले के डीपीओ अशोक पांडेय, डीसीपीओ नवनीत स्वर्णकार और संचालनालय स्तर पर जाँच अधिकारी श्रुति नेरकर थी।
मंत्री बंगले के सामने ‘प्रदर्शन’
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मासूम के साथ बालगृह में दुष्कर्म और विभागीय अफसरों की लीपापोती से आम लोगो में आक्रोश है। महिला बाल विकास मंत्री को आईना दिखाने मदर्स केयर वुमेंस एंड चिल्ड्रन्स वेलफेयर सोसायटी छत्तीसगढ़ की महिलाओ ने राजा तालाब स्थित उनके बंगले के सामने प्रदर्शन किया। इस मामले पर जिम्मेदार कुछ भी कहने से बच रहे है। मंत्री अनिला भेंडिया ने जाँच कराने का आश्वासन दिया है तो बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष तेजकुमारी नेताम ने प्रकरण कोर्ट में होने की बात कर कुछ भी कहने से मना कर दिया।
सुलगते सवाल-
0 आखिर अभी तक हाईलेवल जाँच समिति नहीं बनी, क्यों ?
0 घटना को लेकर अधिकारियो की जिम्मेदारी तय नहीं, क्यों?
0 संवेदनशील मामले पर संचालनालय के अफसरों की चुप्पी, क्यों ?
0 जिम्मेदार किसका बचाव कर रहे ?
