छत्तीसगढ़ महतारी की बेटियां, जिन्होंने अपने दम पर बनाया मुकाम.. कार्यकुशलता से लोहा मनवाया

स्वतंत्र बोल

रायपुर 26 अगस्त 2022. समाज में बेटे और बेटियों में फर्क किया जाता है पर बेटियां, बेटो से कम नहीं है। छत्तीसगढ़ महतारी की बेटियों ने अपने दम पर अपना मुकाम बनाया है। चाहे वे राजनीति का अखाडा हो या सरकारी दफ्तर, इन बेटियों ने अपने कार्यकुशलता से लोहा मनवाया है। स्वतंत्र बोल बता रहा उनके बारे में-
1. किरणमयी नायक

प्रदेश कांग्रेस की दिग्गज नेत्री और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष है किरणमयी नायक। श्रीमती नायक पेशे से वकील है, उन्हें 30 वर्षो से अधिक समय के वकालत का लंबा अनुभव है। इनकी गिनती प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज महिला नेत्रीयो में होती है, इन्होने अपने दम पर अपना मुकाम बनाया है। बीजेपी के दिग्गज नेता के खिलाफ विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी भी रही पर किस्मत ने साथ नहीं दिया। वे आज भी राजनीती में सक्रीय है। राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष बनने के बाद रिकॉर्ड तोड़ केस निपटाये। अध्यक्षीय कार्यकाल के दो वर्षो में श्रीमती नायक ने 2900 से अधिक मामलो का निपटारा किया। इनमे कुछ मामले दस वर्षो से पुराने थे। श्रीमती नायक का पूरा ध्यान महिलाओ को क़ानूनी सहायता दिलाने और उनके अधिकारों पर है। श्रीमती नायक ने कहा “महिलाओ को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, आयोग के माध्यम से उन्हें न्याय देना ही प्राथमिकता है। अभी वे महिलाओ कानून की जानकारी देने महतारी न्याय रथ निकाला है जो प्रदेश के सभी जिलों में महिलाओ को उनके अधिकारों से अवगत कराएगा।
2. सुश्री सौम्या चौरसिया

छत्तीसगढ़ महतारी की बेटी और तेजतर्रार अफसर सुश्री सौम्या चौरसिया राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी है, वे अभी मुख्यमंत्री सचिवालय में डिप्टी सेक्रेटरी है। इन्होने अपने प्रशासनिक क्षमता से खुद को साबित किया है। सुश्री चौरसिया मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ होने वाली पहली महिला अफसर है, इन्होने अपने कार्यकुशलता और दम ख़म से अपना अलग मुकाम बनाया है। मुख्यमंत्री सचिवालय में होने वाले कामो और फाइलों पर बारीक़ नजर रखती है। उनकी सिस्टम पर पैनी निगाह होती है, मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए फैसलों का तेजी से क्रियान्वयन कराने का काम बखूबी करती है। सुश्री चौरसिया सीएम को जरुरी फीडबैक भी देती और उनके अहम् बैठकों एजेंडा स्वयं देखती है। अनावश्यक ताम झाम और लाइम लाइट से दूर शांति से अपना काम करने पर भरोसा करती हैं। उनका एक लाइन का मेसेज अफसरों के लिए अहम् होता है। छत्तीसगढ़ माटी पुत्री सुश्री चौरसिया प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने वाली बेटियों के लिए रोल मॉडल है।
3. फूलोदेवी नेताम-

बस्तर के धुर नक्सल क्षेत्र से दिल्ली के संसद भवन की दुरी तय की फूलोदेवी नेताम ने। अपनी सादगी और विनम्रता के पहचाने जानी वाली श्रीमती नेताम ने अपने दम पर राजनीती में मुकाम बनाया है। राजनीती में बडे ओहदे तक पहुंचने के बाद बेहद सादगी और सीमित संसाधनाें के साथ अपना जीवन जीती है। वे अपनी जडों से पूरी तरह जुडी हुई हैं और निजी जिंदगी में आज भी एक आम ग्रामीण महिला की तरह रहती हैं। वहीं दूसरी तरफ एक मजबूत नेता के रूप में भी उनकी छवि बनी हुई है। श्रीमती नेताम जनपद अध्यक्ष से राज्यसभा सदस्य और महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष तक पहुंची है। वे साल 1998 में केशकाल विधानसभा से विधायक भी रही है। बेहद शांत फूलोदेवी नेताम ने सदन में राज्य की प्रमुख मांग से सदन को अवगत कराया था। उन्होंने साल 2021 में छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने की मांग राज्यसभा सत्र में की थी। उन्होंने सदन में कहा था कि “ अन्य राज्यों के जैसे छत्तीसगढ़ी को भी राजभाषा का दर्जा दिया जाए। ये मांग वर्षों पुरानी है.. इस मांग को पूरा किया जाए और छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिया जाए।” फूलोदेवी नेताम महिला के रूप पहचानी जाती है वे साल 2013 में हुए झीरम घाटी हत्याकांड के दौरान 4 घंटो तक नक्सलियों के बीच फंसी हुई थी।
4. आईपीएस अंकिता शर्मा-
अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ की पहली महिला आईपीएस अधिकारी है। मूलतः दुर्ग जिले से संबंध रखने वाली अंकिता तीन बहनो में सबसे बड़ी है। व्यापारी पिता से धैर्य और गृहणी माँ से अंकिता ने साहस सीखा। अंकिता साल 2018 में यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा क्रैक की और 203वीं रैंक प्राप्त कर छत्तीसगढ़ की पहली महिला आईपीएस ऑफिसर बनी। वे राजधानी में भी पदस्थ रही है और बेहद तेज तर्रार अधिकारी के रूप पहचानी जाती है। उनके पति विवेकानंद शुक्ला भारतीय सेना में कैप्टन है। अंकिता शर्मा वर्तमान में नवगठित जिला खैरागढ़ की ओएसडी है।

 

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