चौपाल चर्चा: ट्रांसफर से मालामाल हुए ओएसडी और निज सहायक, बालिका गृह में दुष्कर्म, दुष्कर्मी कौन ?

राहुल गोस्वामी
चौपाल चर्चा 5 अक्टूबर 2022.
बालिका गृह में दुष्कर्म, दुष्कर्मी कौन ?
एक बड़े जिले में संचालित बालिका गृह में नाबालिक के साथ साल भर पहले दुष्कर्म हुआ, प्रबंधन मामले को दबाने में जुटा रहा। समय के साथ युवती का गर्भ बढ़ा तो मामला सार्वजनिक हुआ। पुलिस ने प्रारंभिक जाँच के बाद दुष्कर्म के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और मामला रफा दफा कर दिया। उधर युवती ने मृत बच्चे को जन्म दिया। पुलिस ने डीएनए चेक कराया तो साल भर बाद पता चला की आरोपित मृत बच्चे का जैविक पिता नहीं है, इसके बाद सवाल उठता है की उक्त बच्चे का जैविक पिता कौन है। युवती के साथ दुष्कर्म की आशंका है, पर किया किसने? क्या युवती से दुष्कर्म बालिका गृह में हुआ? ऐसे दर्जनों सवाल है जिसका जवाब मिलना बाकी है। मानसिक रूप से अस्वस्थ्य युवती मृत बच्चे के पिता के बारे में बताने में असमर्थ है। कुछ वर्षो पहले बिहार के बालिका गृह में बिहार सरकार के मंत्री द्वारा बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओ ने सबको हैरान कर दिया था, जिसके बाद से ही बच्चियों के बालिका गृह, कन्या छात्रावास में पुरुषो के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और महिला अधिकारियो को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी।
विभीषण कौन ?
महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियो ने जिस मामले को कफ़न दफ़न कर दिया दिया था, एक साल बाद तथात्मक दस्तावेजों के साथ बाहर आ गया, जिसके बाद विभाग के अफसर परेशान है। गड़बड़ी, घोटालो, भ्रष्टाचार और षड़यंत्र के कुख्यात इस विभाग में अफसरों के बीच शीतयुद्ध की स्थिति रहती है, उसमे इस मसले ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। इस संवेदनशील मसले के बाहर आने से अफसर विभाग के विभीषण को ढूंढ रहे है। कुछ दिनों पहले इसी विभाग में एक जिले में 9 कर्मियों को कलेक्टर ने बर्खास्त किया था जिसमे उस सेक्शन को देखने वाले अफसर की बिदाई हो गई थी, उसके बाद ही मामला उजागर हुआ है।

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ट्रांसफर पोस्टिंग..1
कांग्रेस सरकार बनने के बाद चौथे साल में ट्रांसफर से बैन हटा। सरकार ने दो मंत्रियो की समिति बनाकर ट्रांसफर का जिम्मेदारी दी। ट्रांसफर पोस्टिंग से मंत्रियो के ओएसडी, निज सहायको की चांदी हो गई तो लाभ कंप्यूटर ऑपरेटर्स तक मिला। महिलाओ की सुरक्षा के लिए काम करने वाले विभाग में धड़ल्ले से ट्रांसफर हुआ, इसके लिए मैनेजमेंट संभालने वालो ने दस से 15 पेटी तक वसूला और जिन्होंने सहयोग नहीं किया उन्हें सैकड़ो किलोमीटर दूर भेज दिया। इस खेल में मंत्री बंगले के ओएसडी, निज सहायक और एक आयातित कारोबारी ने जमकर धन संग्रह किया। कारोबारी इस तरह के एकत्रित धन से बिलासपुर में शादी घर बनवाया और फार्म हाउस ख़रीदा है। करीब आधा दर्जन चार पहिया घर की शोभा बढ़ा रही है तो ओएसडी ने पैतृक गाँव कनेरी में जमीन, कुशालपुर में घर बनाकर भाई को दिया है। ओएसडी की शुरूआती दिनों में जलवा था पर साहब के देवलोक गमन के साथ ही समय बदल गया, पर लाभ से वंचित अब भी नहीं है। पढाई लिखाई वाले विभाग में विप्र देवताओ का जलवा है। बिना लक्ष्मी दर्शन के साहब फाइल नहीं देखते, उन्होंने तबादले के मौसम में दाम तय कर दिया था जिसके अनुसार हु काम होता रहा। जिसने दाम चुकाया उसका आदेश जारी होने के दो दिनों बाद संशोधन भी हो गया।
ट्रांसफर पोस्टिंग.. 2
राज्य सरकार ने 15 से 30 सितंबर तक तबादलों की अनुमति दी। इससे पहले तबादलों की अनुमति नहीं थी, फिर भी प्रदेश में करीब 5000 से अधिक तबादले हुए है। कुछ दिनों पहले राज्य सरकार ने आदेश जारी उन तबादलो के बारे में जानकारी मांगी तो हड़कंप मच गया। बताते है कि अधिकांश तबादलों में मुख्यमंत्री से समन्वय ही नहीं था फिर भी अधिकारियो ने बड़े पैमाने तबादले कर डाले थे। इनमे सबसे अधिक महिला बाल विकास विभाग है, जहाँ बड़े पैमाने पर तबादले हुए थे।
बीजेपी प्रभारी के लिए आवास-
डी. पुरंदेश्वरी के स्थान पर ओमप्रकाश माथुर को प्रदेश भाजपा का नया प्रभारी बनाया गया है, उन्हें प्रभारी बने दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका पर वे अभी तक प्रदेश नहीं पहुंचे है। बीते दिनों प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने उनसे दिल्ली जाकर भेंट मुलाकात किया था। माथुर के दशहरा बाद आने की चर्चाये थी पर अब छोटी, बड़ी दोनों दिवाली बीत चुकी है, बचा है तो देव दीवाली। बताते है कि माथुर के पास दिल्ली में प्रदेश की राजनीति की जानकारी पहुंच रही है। हो सकता है गुजरात चुनाव के बाद प्रदेश में सीधे साजो सामान के साथ पहुंचे। ऐसे में बीजेपी कार्यकर्त्ता उनके लिए सुविधाजनक आवास ढूंढ रहे है। आम तौर पर बीजेपी नेता फाइव स्टार होटल की तरह बने बीजेपी कार्यालय में ठहरते है पर माथुर के लिए एक अलग आवास ढूँढा जा रहा है, जहाँ वे सभी तरह के कार्यकर्ताओ से बात कर सकेंगे।
नए को मौका..
चुनाव में ज्यादा दिन शेष नहीं है, भाजपा कांग्रेस अभी ग्राऊंड स्तर पर संगठन और सरकारी योजनाओ की जानकारी जुटा रहे है तो आम आदमी पार्टी जमीं तलाश रही है। आप का फोकस दोनों ही पार्टिओ से नाराज नेताओ पर रहेगा। वही बीजेपी के संगठन महामत्री की बैठक में कार्यकर्त्ता नए को टिकट देने की मांग कर रहे। कार्यकर्ताओ को पुराने चहरे से नाराजगी है, कारण चाहे जो भी हो। बीजेपी में 14 विधायक है, ऐसे में इस बार नए चेहरों पर दांव लगा सकती है। सुनते है कि इसके लिए सर्वे चल रहा है, विधानसभा स्तर पर प्रत्याशी की तलाश जारी है। पुराने मठाधीशो को पार्टी इस बार आराम देगी। वही हाल लगभग कांग्रेस का है. जिसमे भी व्यापक फेरबदल हो सकता है। अधिकांश विधायकों का रिपोर्ट कार्ड ठीक नहीं है, विधायक की उपस्थिति मतदाताओं के बीच नहीं है ऐसे में मतदाता नाराज है। मुख्यमंत्री गाँव गरीबो के लिए योजनाए बना रहे पर उन्हें सही तरीके से लाभ नहीं मिल पा रहा, जिसके जिम्मेदार विधायक है। ऐसे में नाराजगी दूर करने सरकार ऐसे निष्क्रिय विधायकों को नमस्ते कर सकती है।
चौथा उपचुनाव..
भानुप्रतापपुर उपचुनाव मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के चौथा उपचुनाव होगा। इससे पहले मरवाही, खैरागढ़ और दंतेवाड़ा में उपचुनाव हुआ था, जहाँ कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीता था। अब एक बार फिर उपचुनाव की दुदुंभी बज गई है। भानुप्रतापपुर में नामांकन 10 नवंबर को और मतदान 5 दिसंबर को होगा। विधानसभा उपाध्यक्ष मनोज मंडावी के निधन के बाद खाली हुए इस सीट पर कांग्रेस उनकी पत्नी सावित्री मंडावी को उम्मीदवार बना सकती है। इससे उन्हें सहानुभूति का लाभ मिल सकता है, कांग्रेस के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं है। बीजेपी को चुनौती मुख्यमंत्री भूपेश बघेल देंगे। वही भाजपा आसान नहीं है, पिछले चुनाव में देवलाल दुग्गा दूसरे तो आप पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हूपेन्डी तीसरे स्थान पर रहे।
शानदार राज्योत्सव
राज्य स्थापना दिवस और आदिवासी नृत्य महोत्सव का शानदार आयोजन हुआ। तीन दिनों तक के आयोजन में प्रदेश भर लोग पहुंचे थे, लोगो के उत्साह को देखते हुए सरकार ने राज्योत्सव को तीन दिन और बढ़ा दिया। इस बार दस देशो और 28 राज्यों के कलाकार पहुंचे थे। सरकार ने इसके लिए जमकर संसाधन खर्च किया और अधिकारियो ने मेहनत। थोड़ी निराशा जरूर हुई कि आमंत्रण के बाद भी अन्य राज्यों के नेता नहीं पहुंचे।

 

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