चौपाल चर्चा: मंत्री को घेरने में जुटे उनके ही सिपहसलार, मृदुभाषी आईएएस और 25 लाख में बिक गई जाँच एजेंसी?

चौपाल चर्चा

शिकायत में खर्च हुए 25 लाख!

एक मलाईदार विभाग के दो अधिकारियो की शिकायत भ्रष्टाचारियो पर कार्यवाही करने वाली एजेंसी से हुई। एजेंसी ने कार्यवाही के लिए दस्तावेज जुटाने शुरू किये तो बात संबंधित अधिकारियो तक पहुंची। कार्यवाही के भय से सहमे अधिकारी भागते जाँच एजेंसी के कार्यालय पहुंचे और “त्राहिमाम-त्राहिमाम” रटने लगे। जाँच अधिकारी ने परिस्थितियों को समझा और कुछ गोपनीय बैठकों के बाद मामला शांत हुआ। बताते है कि इसके लिए अधिकारियो ने 25 लाख रुपये खर्चा किया है, और वे जगह जगह इसका दुखड़ा रो रहे है। अधिकारियो द्वारा की जा रही रुदन जाँच एजेंसी के लिए ठीक नहीं है। जाँच एजेन्सी के मुखिया बेहद साफ़ छवि के माने जाते है।

कमीशन भी गया और इज्जत तार तार हो गई..

प्रदेश के एक विश्वविद्यालय में लाखो रुपयों का कंप्यूटर ख़रीदा गया, सप्लाई के बाद आदत से मजबूर जिम्मेदारों ने कमीशन माँगा। सप्लायर ने लाभ ना होने की बाते कर कमीशन देने से इंकार किया तो छह सालो से भुगतान अटक गया। सप्लायर कोर्ट कचहरी और आयोगों में माथा ठेका आयोग ने जाँच उपरांत जमकर फटकार लगाया और सीधे कार्यवाही के लिए उच्च शिक्षा विभाग को लिख दिया। रिपोर्ट सार्वजनिक होने से किरकिरी हुई। छह सालो से भटकते भटकते कुछ दिन पहले राजभवन ने आदेश जारी कर भुगतान करने निर्देशित किया है, अब कही सप्लायर को भुगतान होगा। ऐसे में सम्बन्धित को कमीशन भी नहीं मिला और कोर्ट कचहरी का खर्चा अलग से।

मृदुभाषी आईएएस…

एक प्रमोटी आईएएस इन दिनों सुर्खियों में है। हो भी क्यों ना जब पूरा विभाग चर्चा में हो तो आईएएस का चर्चा में होना लाजमी है। अनिश्तिताओ के दौर में ढाई वर्षो से ज्यादा समय तक विभाग प्रमुख है। विभाग के बड़ी गड़बड़िया अब तक छुपी रही। खरीदी- बिक्री, सप्लाई में करोडो का झोल हुआ, सीएसआर मद से गाडी, बंगले के रंग रोगन में लाखो फूकना सहित गड़बड़िया अब सब सामने आ रहा है। बेहद मृदुभाषी आईएएस परेशान है। दरअसल आईएएस को अपने अधीनस्तो पर आवश्यकता से अधिक भरोसा करना महंगा पड़ गया। अति सर्वत्र वर्जयेत ऐसे ही नहीं कहा गया है। ऐसे में विभाग के अन्य कर्मी कहते फिर रहे कि शांतिपूर्वक कंबल ओढ़कर ज्यादा दिन घी नहीं पिया जा सकता।

गुरु शिष्य की जोड़ी..1

बस्तर विश्वविद्यालय में गुरु शिष्य की जोड़ी गुल खिला रही है। यहाँ के कुलपति पहले रविशंकर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर रहे तब वर्तमान के कुलसचिव ने उनके निर्देशन में शोध किया। बाद में प्रोफ़ेसर कुलपति बने तो अपने शोधार्थी छात्र को बुला प्रतिनियुक्ति पर रजिस्टार बनवा लिया, तब से गुरु शिष्य की जोड़ी हर मसले में एक साथ है। विश्वविद्यालय भले ही लाखो रुपये फुंकने के बाद सी श्रेणी मिला हो पर गुरु और शिष्य दोनों ‘ए प्लस’ है। गुरु बनारस से तो चेला कानपुर से है। दोनों ने संसाधनों का उपभोग करने में सबको पीछे छोड़ किया है। सादा जीवन उच्च विचार का नारा बुलंद करते हुए करोडो की फर्नीचर खरीदी,सरकारी गाडी का दोहन,  दीक्षांत में करोडो का झोल कर डाला है। अब चला चली की बेला में पांच सालो के पाप निकलने लगे है, ऐसे में बचे हुए दिन मुश्किल में कटेंगे।

गुरु शिष्य की जोड़ी..2

न्यायधानी के एक विश्वविद्यालय में ग्रंथपाल के लिए वेकेंसी निकली, सैकड़ो आवेदन भी आये। कुलपति ने चयन सूची बनाई और दावा आपत्ति मंगाया। चयन सूची में वहा बरसो से कार्यरत महिला कर्मी पहले नंबर पर रही। पीएचडी, एम.लिब. समेत सभी जरुरी योग्यता थी उसमे। बाते योग्यता से कुछ आगे बढ़ी इसी बीच राजधानी से फ़ोन कुलपति को बजा। बात इंटरव्यू पैनल बोर्ड तक पहुंची, इंटरव्यू पैनल में वही महोदय शामिल हुए जिन्होंने चयनीत अभ्यर्थी को पीएचडी कराया था। रविशंकर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर ने अपने शिष्य के लिए कुलपति से आग्रह किया और बात बन गई। बताते है कि इसके बाद चयनित पटेल ने दुर्ग जिले में बेशकीमती जमीन कुलपति को गिफ्ट किया है।

जनवरी में होगी बेटे की रॉयल शादी!

एक विभाग के सहायक संचालक अपने बेटे की शादी की तैयारियों में जुटे है, शादी संभवतः जनवरी 2023 में होगी। अनमोल बेटे की शादी करने पूरा परिवार छह महीने पहले से तैयारियों में जुट गया है। शादी, मंडप, खाना, कपडे सभी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बताते है कि इकलौते बेटे की शादी एकदम रॉयल तरीके करना चाहते है, इसमें वे कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते है। आखिर दो ही बच्चे है एक लड़का और एक लड़की। अब सवाल है कि भव्य शादी के लिए पैसे कहा से आएंगे… पता चला है कि साहब के पास साधन और संसाधनों की कमी नहीं है, वे सबको खरीदने का दंभ भरते है।

मंत्री को घेरने में जुटे उनके ही सिपहसलार

अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुख रखने वाले एक मंत्री के लिए उनके करीब रहने वाले सिपहसलार ही गड्डा खोद रहे है। किस्मत की मारी मंत्री उन पर जरुरत से ज्यादा भरोसा करती है, जिसका फायदा करीबी उठा रहे है। हल ही में हुई 200 पदों की भर्ती में बड़ा खेल किया गया, नियमो को जूते की नोक पर रखकर भर्ती की गई और पोस्टिंग पैसो का वजन तौलकर। झोला भरकर लक्ष्मी आते देख मंत्री ने आँखे मूंद ली और सब कुछ करीबियों को सौप दिया। अब करीबी भरे जग से आधा कप पानी जितना दान कर शादी मंडप बना रहे है। सिपहसलार शिकायतों और विभाग की गड़बड़ियों को मंत्री तक पहुंचने नहीं दे रहे जिसका असर मंत्री की छवि पड़ रहा है। कर्मो का घड़ा धीरे धीरे भर रहा, जो साल 2023 में छलकेगा.. तब संभालना मुश्किल होगा।

 

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