छत्तीसगढ़ विधानसभा: आरक्षण विधेयक पर सदन में गर्माहट, विपक्ष ने कहा ‘सदन का राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा’

रायपुर 2 दिसंबर 2022: छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे और अंतिम दिन की कार्यवाही शुरू होते ही बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि पीसीसी अध्यक्ष के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। सदन की कार्यवाही पूर्व प्रचारित किया गया।

अजय चंद्राकर ने कहा कि ट्वीट कर कहा गया कि हम आदिवासियों के साथ हैं। मुख्यमंत्री ने भी लिखा कि हमने सत्र आहुत करने का आग्रह किया है. पीसीसी चीफ़ और मुख्यमंत्री को यह कैसे पता चल गया कि सत्र 1 और 2 दिसंबर को आहुत किया जाएगा. हमने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। इस पर चर्चा कराई जाए। कौन सा विधेयक है, जिसे अब तक वितरित नहीं किया गया है।

अजय चंद्राकर ने सदन के राजनीतिक दुरुपयोग की बात कहते हुए कहा कि विधानसभा में जितने सत्र हुए हैं, वह विषय केंद्रीय हुआ है। यदि आरक्षण के लिए विशेष सत्र बुलाया जा रहा है तो फिर अनुपूरक बजट कैसे लाया जा रहा है?संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सत्र के विषय तय किए गए। हमने आरक्षण के विषय पर ही विशेष सत्र आहुत कराया है। पूरे प्रदेश के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। क्या आप इसका विरोध कर रहे हैं।

स्पीकर डॉक्टर चरणदास महंत ने कहा कि सदन में जो भी बिज़नेस आया है, यह कार्यमंत्रणा समिति की तरफ़ से ही आया है। बीजेपी विधायक ननकी राम कंवर ने कहा कि आरक्षण के मामले में सरकार ने कोर्ट में ठीक ढंग से जवाब नहीं दिया। मंत्री शिव डहरिया ने कहा कि बीजेपी की सरकार ने जो ग़लत किया है, आज उसे ही ठीक किया जा रहा है।

बीजेपी विधायक शिव रतन शर्मा ने कहा कि विधानसभा का अपमान है कि सत्र की अधिसूचना जारी होने के पहले पीसीसी चीफ़ मोहन मरकाम को सत्र की जानकारी कैसे मिली? यह विधानसभा की गरिमा का अपमान है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि कार्य संचालन की पुस्तक में ये कहाँ लिखा है कि विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। ये गंभीर विषय है कि जब किसी को यह नहीं पता कि सत्र कब से शुरू होगा। क्या सरकार ने चुनाव आयोग से अनुमति माँगी कि विशेष सत्र बुलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 19 सितम्बर को आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट का फ़ैसला आया था। दो महीने बाद तक सरकार का ध्यान इस ओर नहीं आया। सरकार अधिसूचना जारी कर सकती थी। भानुप्रतापपुर उप चुनाव पाँच दिसम्बर को है। हमारा अनुरोध है कि सत्र 9 दिसंबर को बुलाया जाये। 8 दिसंबर को उप चुनाव के नतीजे आ जाएंगे।

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