राहुल गोस्वामी
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चौपाल चर्चा 29 अक्टूबर 2022.
~पाटन बनेगा जिला ?
प्रदेश में तेजी से नए जिलों की संख्या में इजाफा हुआ है। सरकार ने नए जिलों का गठन कर प्रशासन को आम लोगो के करीब करने का प्रयास किया है। राज्य गठन के समय से प्रदेश में कुल 16 जिले थे जो अब धीरे धीरे बढ़कर 33 हो गया है। चर्चा है कि 2023 के विधानसभा चुनाव तक प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर 36 हो जायेंगे। जिसमे प्रमुख रूप से दुर्ग जिले के अलग होकर एक नया जिला बनाना जा सकता है। दुर्ग वीवीआईपी जिला है जहाँ मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और पीएचई मंत्री आते है। इससे पहले दुर्ग से अलग होकर कबीरधाम, बालोद, बेमेतरा बन चूका है, अब नया नाम चर्चा में है पाटन। अपुष्ट खबरों के अनुसार पाटन को जिला बनाया जा सकता है, राजनितिक गलियारों में इसकी चर्चाये है। अब चर्चाये सही होती या सिर्फ चर्चा तक सिमित रहती है, यह तो आगामी दिनों में पता चलेगा। पाटन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का विधानसभा क्षेत्र है। विधानसभा स्पीकर चरणदास महंत एक कार्यक्रम में कह भी चुके है कि चुनाव आते तक 36 गढ़ 36 जिलों वाला होगा। अभी चुनाव में 11 महीने का समय शेष है।
~चुनावी तैयारी में जुटी सरकार और बीजेपी
सरकार और विपक्ष दोनों ही अब चुनावी मोड़ पर पहुंच गए है। दोनों में बैठकों और चुनावी तैयारी शुरू हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पुनिया आज से तीन दिनों के बस्तर दौरे पर रवाना हुए, वे जंगली क्षेत्रो में संगठन की तैयारीयो का जायजा लेंगे। आज निगम मंडल और आयोग में नियुक्ति की अंतिम लिस्ट भी जारी हो गई। आदिवासी महोत्सव के बाद सरकार का पूरा फोकस चुनाव पर होगा। उधर बीजेपी की अपनी तैयारी है। बीजेपी के संगठन महामंत्री अजय जामवाल प्रदेश में उत्तर के सरगुजा संभाग और दक्षिण के बस्तर संभाग घूम आये है। अभी मैदानी क्षेत्रो में कार्यकर्ताओ की बैठक लेकर जानकारी जुटा रहे है। जामवाल बैठकों में कार्यकर्ताओ से रायशुमारी कर टोह लेने में जुटे है।
~बीजेपी में चेहरा और नेता कौन?
बीजेपी में तमाम बड़े चेहरों में बदलाव और विदाई के बाद कार्यकर्ताओ में उत्साह है। नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, और जिला अध्यक्षो के बदलाव के बाद महीनो बाद कार्यकर्त्ता समझ नहीं पा रहे की चुनाव में नेता कौन और चेहरा कौन होगा? शायद इसीलिए पार्टी कार्यकर्त्ता अभी असमंजस की स्थिति में है। प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद दोनों ही नेताओ ऐसा कुछ नहीं किया जो उनसे अपेक्षाय कार्यकर्त्ता कर रहे थे। दोनों ही बड़े मामलो पर मुखर नहीं है। ऐसे मामलो में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह मुखर है।
~दिवाली फीकी-
कोरोना काल के बाद दिवाली तौर पर उत्साह से मनाया गया। बाजार में भीड़ उमड़ी थी, लोगो ने जमकर खरीददारी की। दिवाली का उत्साह नौकरशाहों, मंत्रियो और पुलिसकर्मियों में अपेक्षाकृत काम नजर आया। इसका बड़ा कारण हाल ही में प्रदेश में चल रही प्रवर्तन निदेशालय की छापामार कार्यवाही है। जिस तरीके से ईडी ने कार्यवाही कर आईएएस समेत दो बड़े कारोबारी को जेल निरुद्ध किया, इससे नौकरशाहों में भय का माहौल है। महीनो से दिवाली का इंतजार करने वाली अफसरों की पत्नियों ने दूर से नमस्कार किया। ऐसा ही कुछ असर माननीयो के बंगले में रहा। उम्मीदों से पहुंचे लोगो को निराशा हाथ लगी।
~विवादों का समाज कल्याण-
समाज के कल्याण के लिए बनाये गए समाज कल्याण विभाग में मनमानी चरम पर है। कहने को अन्य विभागों से काफी छोटा विभाग है पर कारनामे बड़े बड़े विभागों को फेल कर देता है। पूर्व में इसी विभाग में 1000 करोड़ का घोटाला उजागर हुआ था जिसमे अफसरो ने फर्जी एनजीओ बनाकर अरबो का वारा न्यारा किया। उक्त प्रकरण में कई दिग्गज आईएएस को कोर्ट का सामना करना पड़ा था। एक बार फिर विभाग में निराश्रित निधि में करीब 100 करोड़ का घोटाला फूटा है। जिसकी शिकायत पर अफसर बजाये कार्यवाही के कुंडली मारकर बैठा गए है। बताते है कि यहाँ अफसर ना तो सूचना के अधिकार से जानकारी देते है ना ही उसका पालन करते है। मनमानी पर उतरे अफसरों ने सारी सीमाएं लाँघ दी है। जिसके बाद शिकायतकर्ता शिकायती दस्तावेजों का पुलिंदा केंद्रीय एजेंसियो को भेजने की तैयारी में जुटे है।
~गिफ्ट में मिली गाड़ियां..
महिला बाल विकास विभाग में एक निजी बैंक में खाता खोलकर करीब 600 करोड़ रुपये जमाकर करने पर बैंक प्रबंधन ने सीएसआर मद से विभागीय अधिकारियो को चार पहिया वाहने गिफ्ट किया। चार अधिकारियो के लिए चार महंगी गाड़ियां विभाग में पहुंची तो अधिकारी नई चमचमाती गाडी में दफ्तर जाने में उपयोग भी करने लगे। जानकारी बाहर आई तो हल्ला मचा, बताते है की आनन फानन में अफसरों ने वित्त विभाग से अनुमति के लिए फाइल बढ़ाया है। अधिकारियो ने तमाम नियम प्रक्रियाओं को ठेंगा दिखते हुए बैंक में खाता खोल पैसा जमा कर दिया बदले में बैंक ने 50 लाख कीमत की चार गाड़ियाँ बतौर गिफ्ट की। अब मामला खुलने के बाद लीपापोती में जुटे है और गाडी की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक कर्मचारी दी है। इस मामले में संचालनालय के अफसरो पर मुख्य सचिव फट पड़े थे, तो बेहद तेजतर्रार सचिव ने इस मसले पर करुणा दिखाया.. जो अब चर्चा में है।
~विद्वान भी फेल हो जाते-
कहते है कोई कितना भी ज्ञानी हो, जब समय का चक्र चलता है तो ज्ञानी भी मूर्खता कर बैठता है। दरअसल मसला कुछ ऐसा है कि एक विभाग के खटराल किस्म के अफसर ने अपनी गन्दगी को दूसरे अफसर के सर मढ़ दिया। अफसर को इसकी भनक भी नहीं लगी और वे दोस्ती का रिश्ता निभाने में लगे रहे। अफसर ने दोस्त की सलाह पर दूसरे को गलत ठहराते हुए कलम फसाकर खुद गलत कर बैठे। अब जब इसकी जानकारी मांगी जा रही तो विद्वान अफसर पिंड छुड़ाने में जुटे है। दरअसल विद्वान् अफसर की नियुक्ति उनके डॉक्टर भाई के कृपा के चलते रसूखदार विभाग में नियमो का उल्लंघन कर की गई। बीते 22 वर्षो से वे प्रतिनियुक्ति पर है.. अभी तक राज, राज ही था पर अब मामला खुलने लगा है सो मुश्किलें बढ़ेगी।
