राहुल गोस्वामी
चौपाल चर्चा 22 सितंबर 2024.
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बंगले से हुई छुट्टी-
मंत्रियो के ओएसडी, विशेष सहायक और निज सहायक बनने अधिकारियो और कर्मियों के बीच आपाधापी रहती है। अपने पहुंच का उपयोग कर किसी भी मंत्री के बंगले में अटैच होना चाहते है, मंत्री बंगले का सुख लगभग सभी जानते है और जो एक बार किसी मंत्री विधायक के साथ अटैच रहा.. फिर उसका मन अपने मूल विभाग में नहीं लगता है। सत्ता परिवर्तन के बाद चर्चा थी कि जाँच परख करने के बाद ही ओएसडी, निज सहायक और विशेष सहायक बनाये जायेंगे, पर अधिकांश मंत्रियो के यहाँ वही लोग पहुंच गए है जो पूर्व की सरकारो में मलाई का स्वाद चख चुके है। कुछ ने आते ही पिच पर दुआधार बैटिंग करना शुरू कर दिया, जिसके बाद चार ओएसडी की छुट्टी कर दी गई है। मुख्यमंत्री सचिवालय में ओएसडी रहे रविकांत मिश्रा की विदाई हो गई है, उपमुख्यमंत्री अरुण साव के बंगले से गोपाल पटवा, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के बंगले से अजय यादव और लक्ष्मी रजवाड़े के बंगले से चंद्रशेखर देवांगन को हटाया गया। सभी को लेकर गंभीर किस्म की शिकायते थी, कुछ और भी हटाए जा सकते है।
अंगद का पाँव बने अधिकारी, सरकारे बदली.. पर नहीं बदली अधिकारियो की कुर्सी
अफसर की लापरवाही, सरकार पर भारी-
कवर्धा कांड में एक पुलिस अधिकारी की लापरवाही सरकार पर भारी पड़ गया, कैमरा प्रेमी अफसर ने घटना की गंभीरता को समझा होता तो शायद इतना बवाल ना होता। पहले घटना को दबाने की कोशिश की, पीड़ित पक्ष को समझाने की बजाये हड़काया गया और मामला बिगड़ने पर लाठियां भांजी गई, उसमे बच्चे, जवान और महिलाओ में भेद नहीं किया गया। कैमरा की लत ऐसी कि लाठिया बरसाते हुए भी वीडियो बन रहा था। घटना से प्रशिक्षु आईपीएस को सस्पेंड किया गया जबकि जिले में लॉ एंड ऑर्डर बनाये रखने की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक की होती है। आईपीएस वही अफसर है जो कुछ समय पहले एक स्टिंग ऑपरेशन में सत्तापक्ष के नेताओ के बारे में कमेंट करते नजर आये थे।
पीएससी, सब को पोस्टिंग.. !
विधानसभा चुनाव के पहले बीजेपी ने सीजीपीएससी में भर्ती में अनियमितता को लेकर माहौल बनाया, एफआईआर से लेकर सीबीआई तक मामला पंहुचा। सुधार कमेटी भी बनाई गई, पर अब क्या ? बीते नौ महीने से सीजीपीएससी के चेयरमेन का पद खाली है, प्रभारी के भरोसे चल रहा है। कांग्रेस सरकार में नियुक्त सदस्य ही सीजीपीएस चला रहे है और उन्ही में से एक प्रभारी चैयरमेन है। जिन भर्तियों को लेकर विवाद हुआ, उनमे अधिकांश को पोस्टिंग दे दी गई। साल 2022 में हुई भर्ती को लेकर भी वैसी ही चर्चाये है। जाँच में शायद ही कुछ मिले, सरकार को नए अध्यक्ष की नियुक्त करना चाहिए।
साधने का तरीका-
राजधानी के रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में 20 सितंबर को धूमधाम से विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाया गया, कार्यक्रम में कुलधाधिपति व राज्यपाल और सांसद बृजमोहन अग्रवाल को आमंत्रित किया गया। इसके लिए आमंत्रण पत्र छपवाए और बांटे गए, सप्ताह भर तक विश्वविद्यालय के जिम्मेदार कार्यक्रम की तैयारी में जुटे रहे। अब बात इसके पीछे की कहानी की, विश्वविद्यालय का स्थापना 1 मई 1964 को हुआ था, ऐसे में स्थापना दिवस को 1 मई को मनाया जाता पर कथित तौर पर चुनावी आचार सहिंता के चलते नहीं मनाया गया। स्थापना दिवस, विश्वविद्यालय का कार्यक्रम होता है जिसे मनाया जा सकता था पर कुलपति और प्रभारी कुलसचिव ने सरकारी खर्च में अपना नंबर बढ़ाने चार महीने बाद कार्यक्रम कर दिया। ऐसे कार्यक्रमों के बहाने प्रदर्शन और मुख्य विषयो से नेताओ का ध्यान भटकाया जा सकता है, वीसी की नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट में पेंडिंग है तो कई दौर की जाँच में दोषी पाए गए एक्टिंग रजिस्ट्रार को अज्ञात शक्तिओ का सहयोग मिल रहा और विभाग कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।
पांडेय ने किया शर्मा निपट गए-
पाठ्य पुस्तक निगम की किताबो को लेकर पूर्व विधायक के खुलासे के बाद सरकार ने जाँच समिति बनाया। मामला बेहद गंभीर था, ऐसे में एमडी पाठ्य पुस्तक की अध्यक्षता में जाँच समिति बनाई गई और जो हुआ उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। जाँच समिति में शामिल अधिकारी महाप्रबंधक को प्रेम प्रकश शर्मा को जिम्मेदार ठहराते हुए सस्पेंड कर दिया, जबकि सर्विदित है कि मामला पांडेय के कार्यकाल का है। पांडेय सैकड़ो एकड़ का फार्महाउस और बंगलो बनाकर आनंदित है और बेचारे आते ही शर्मा निपट गए। अगर सही जाँच हो तो आंच अन्य शर्मा तक भी पहुंचेगी।
मैडम से परेशान-
एक मंत्री के बंगले में अधिकारी और स्टाफ एक मैडम से परेशान है, मैडम के सामने ओएसडी तक की नहीं चलती। मैडम भी पंचायत विभाग से है, इसे पहले हाईप्रोफाइल जगहों में नहीं रही, जिसका नुकसान मंत्री को रहा है। चर्चा तो ऐसी भी है कि मैडम जरुरी नोटशीट को व्हाट्सअप में किसी परिचित को भेजकर सलाह लेती है, और अप्रूवल आने के बाद ही फाइल आगे मंत्री तक पुटअप होता है।
अरबो की जमीन, कौडियो के भाव-
प्रदेश में मठ मंदिरो की जमीन पर शुरू से भूमाफियाओ की नजर है। ऐसे ही एक मठ के अरबो की जमीन को 30 साल के लिए जमीन कारोबारियों को कौड़ियों के भाव मठ प्रबंधन द्वारा दिया जा रहा है। इससे मठ को कितना फायदा होगा या नुकसान..पर जमीन कारोबारी और ट्रस्ट माफियाओ को बड़ा फायदा होगा। इश्तहार में कहा कि हाइवे स्थित खेती की जमीन से धूल और प्रदूषण से मुनाफा नहीं हो रहा, ऐसे में अग्रवाल बंधुओ को 30 सालो के लिए लीज पर दी जाती है।
एक और इंदिरा प्रियदर्शिनी ?
राजधानी के इंदिरा प्रियदर्शिनी महिला नागरिक सहकारी बैंक को लोग भूले नहीं है, जहा 50 करोड़ रुपये से अधिक घोटाला हुआ और अंत में बैंक में ताला लग गया। मामले में राजनीती भी हुई और सब ठन्डे बस्ते में.. राजधानी का लक्ष्मी महिला नागरिक सहकारी बैंक भी उसी नक़्शे कदम पर है। बैंक में खाताधारकों के दस्तावेजों का उपयोग कर प्रबंधन ने लाखो का लोन निकाला और उसकी रिकवरी महतारी वंदन योजना से मिलने वाले पैसो से शुरू कर दी। लोन फर्जीवाड़ा से महिलाये कर्जदार बन गई, जो शायद ही कभी ऋण मुक्त हो पाएंगी।
