राहुल गोस्वामी
चौपाल चर्चा 10 मार्च 2024.
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राजधानी में तीन दिवसीय आयोजन
लोकसभा चुनाव के लिए आचार सहिंता 12 मार्च के बाद कभी भी प्रभावशील हो सकती है। ऐसे में राज्य सरकार ने कम समय में अधिक से अधिक लोगो तक सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने राजधानी में तीन दिवसीय बड़ा आयोजन किया है। राजधानी के साइंस कॉलेज में पहले दिन किसानो को साधने किसान कुंभ का आयोजन किया, जिसमे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हजारो किसानो को संबोधित किया, तो दूसरे दिन महिलाओ को साधने महतारी वंदन योजना अंतर्गत 70 लाख महिलाओ को राशि का वितरण किया गया, इसमें में बड़ी संख्या में प्रदेश भर से महिलाये शामिल हुई। उसके अगले दिन पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन होगा जिसमे केंद्रीय राज्य मंत्री कपिल मुरेश्वर पाटिल शामिल होंगे, कार्यक्रम में हजारो की संख्या में प्रदेश भर से ग्राम पंचायतो से जुड़े जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। इस तरह तीन दिनों में सरकार ने लाखो लोगो तक पहुंचने का प्लान बनाया है।
शांति से निपटा दिए गए भैया-
लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी से जिसे टिकट मिली वे सभी खुश है सिवाय एक उम्मीदवार के, जहाँ सारे उम्मीदवार हर्षित है तो राजधानी से उम्मीदवार बने बृजमोहन अग्रवाल को पार्टी के ऐसे निर्णय का जरा भी अंदेशा नहीं था। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने बड़ी ही ख़ामोशी से मोहन भैया को किनारे लगा दिया, अब उनके सामने दोहरी मुसीबत है कि चुनाव परिणाम अनुकूल आये तब भी मंत्री पद छोड़ना होगा और प्रतिकूल आये तब भी.. बात ऐसा है कि संगठन के नेता उनसे नाराज थे। मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान मोहन भैया ने कुशाभाऊ ठाकरे में जो तेवर दिखाए थे वे राष्ट्रीय नेताओ को पसंद नहीं आया। आरएसएस के पदाधिकारियों को भी ऐसे बर्ताव से नाराजगी थी, तत्कालीन में शीर्ष नेतृत्व ने हामी भर मामला ठंडा कर दिया था, पर उन्होंने अपनी ताकत का अहसास कर दिया।
मुख्यमंत्री का हाउस प्रवेश और सादगी-
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीन बाद मुख्यमंत्री निवास में परिजनो की मौजूदगी ने विधिविधान से पूजा पाठकर गृह प्रवेश किया। अधिकांश लोगो को गृह प्रवेश में होने वाले भोज की अपेक्षा थी पर ऐसा नहीं हुआ। साय जी ने अपनों के साथ बड़ी ही सादगी से प्रवेश किया। दरअसल लोगो की अपेक्षाएं इसलिए थी कि पूर्व सीएम रहे भूपेश बघेल ने जब हाउस प्रवेश किया तो प्रदेश भर से मंत्री विधायक नेता, कार्यकताओ और अधिकारियो को आमंत्रित किया था। हाउस में जलसा का माहौल था, पर साय जी के गृह प्रवेश के समय ऐसी स्थिति नहीं थी। ऐसे में प्रशासन से जुड़े कुछ लोगो का मानना है कि सीएम साहब बेहद सादगी पसंद है, अनावश्यक तामझाम और खर्च नहीं चाहते।
कभी जलवे थे, अब…
2006 बैच के आईएएस भुवनेश यादव को उम्मीदें रही होंगी कि उनके बैचमेट सीएम होउसे में सेक्रेटरी बने तो उसका लाभ मिलेगा, पर समय के साथ उनके साथ अन्याय हो गया। पूर्व की सरकार में जहाँ एक साथ उद्योग, उच्च शिक्षा, महिला बाल विकास और समाज कल्याण सहित चार- चार विभागों के सचिव हुआ करते थे, समय ने करवट ली तो सिर्फ एक राजस्व और आपदा प्रबंधन में जा अटके। उसमे भी चूक की तो सरकार ने बिना विभाग के शांत करने में देरी नहीं की। दरअसल यादव जी ने राजस्व अधिकारियो के पोस्टिंग में चूक कर गए तो नाराज सरकार ने समझा दिया कि अब नहीं सहिबो.. दरअसल पूर्व में महिला बाल विकास और उच्च शिक्षा में भी ऐसी ही गलतियां की गई, सत्ता परिवर्तन के बाद पर्यवेक्षकों की पोस्टिंग में भी चूक की गई थी। पहले वाले आयुर्वेदिक थे सब सह जाते थे, पर अब वाले एथिकल है, तुरंत रिएक्शन..।
और जब मुख्यालय में तालाबंदी हो जाए तो..
सरकारी विभागों में ब्लॉक और जिला स्तर में काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी अभी तक धरना प्रदर्शन करते रहे है, आंदोलन के पूर्व विभाग प्रमुखों तो बाकायदा पत्र लिखकर सूचित करते थे पर महिला बाल विकास विभाग के संचालनालय में पदस्थ अफसरों का दुस्साहस देखिये कि एक तरफ जहाँ सरकार महतारी वंदन के कार्यक्रम में जुटी थी उधर ठीक उसके पहले मुख्यालय में तालाबंदी कर खड़े हो गए। पहली बार ऐसा हुआ कि नवा रायपुर में प्रदेश मुख्यालय में तालाबंदी कर दिया.. दो कर्मियों के बीच की नोकझोक को इतना टूल दिया कि तालेबंदी की नौबत आन पड़ी। दरअसल पूरी लड़ाई संचालनालय में लंबे समय से जमे खटराल अफसरों के द्वारा आग में घी डाला गया था। अगर अफसर चाहते तो ऐसा किरकिरी ना होती। मुख्य सचिव और विभागीय सचिव शम्मी आबिदी को ऐसे मामलो पर सज्ञान लेना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओ की पुनरावृति ना हो।
सुदूर जंगल में-
पुलिस विभाग ने एक साथ 74 एडिशनल एसपी के तबादला हुआ। पूर्व की सरकार में प्रभावशाली रहे अफसरों को धुर नक्सल प्रभावित जगारकुंडा, अरनपुर भेजा गया। ऐसे अफसर जिन्होंने ने पांच साल एक तरफा लाभ लेते रहे, कई ऐसे भी थे जो डीजीपी की बैठक में फॉर्मल ड्रेस पहनकर पहुंच जाते थे। अब उन्हें सीधा और स्पष्ट मेसेज दिया गया है। बताते है सूची के बाद कुछ तबादले में संशोधन की आस में गृहमंत्री और डीजीपी से मिलकर मनुहार कर चुके है।
