चौपाल चर्चा: मंत्री, सचिव और संचालक.. सब महिलायें, पहली प्राथमिकता कार्यकर्ताओ को.. और फरियादियों को ना।

राहुल गोस्वामी
मंत्री, सचिव और संचालक.. सब महिला
एक सरकारी विभाग में मंत्री, विभागीय सचिव और संचालक अब तीनो ही महिलाये है। अब जब प्रमुख पदों में महिलाये हो तो काम होने और समझने में आसानी होगी। इस बार माहौल कुछ बदला बदला सा है, पूर्व की मंत्री शांत स्वभाव की थी, वो कंबल ओढ़कर घी पीने में भरोसा करती थी.. तो मौजूदा बेहद तेजतर्रार और विषय की समझ रखने वाली.. मंत्री ने पहले ही कह दिया उन्हें सीधा ना समझे अफसर। इस घुड़की का ऐसा असर हुआ कि गुलदस्ता लेकर सर्किट हाउस का चक्कर लगाने वालो को अब दूसरा तरीका ढूँढना पड़ रहा है। पूर्व में प्रमुख पदों पर बैठे व्यक्ति और सप्लायर अभी बेचैन है।
ओएसडी बनने परिक्रमा-
कैबिनेट मंत्रियो के ओएसडी और मंत्री स्टाफ में शामिल होने अफसरों और अन्य में भारी प्रतिस्पर्धा चल रही है। पूर्व में रहे मंत्री स्टाफ और ओएसडी के जलवो को देखकर बाकी लोगो का मन भी उसी दिशा में दौड़ रहा है,जिसके लिए वे हर उस जगह से फूल चढ़ा रहे जहा उन्हें उम्मीद है। वर्तमान में कुछ मंत्रियों को छोड़कर बाकी मंत्रियों के स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाई है, ऐसे में दावेदार हर संभव कोशिश कर रहे। अनुभवी और कांग्रेस सरकार में मलाई का स्वाद चखने वाले भी सक्रीय है। सीनियर मंत्री के यहाँ बैकडोर से जगह भी बना ली। कांग्रेस सरकार में एक विश्वविद्यालय में कुलसचिव रहे, जलवा- जलाल रहा, गंभीर शिकायते हुई फिर भी उसे नजर अंदाज किया गया। बताते है की एक खेल सामग्री सप्लायर ने मध्यस्थता की है। एक अपर कलेक्टर ने बिना आर्डर निकले कृषि मंत्री के ज्वाइन भी कर लिया है, वे कांग्रेस सरकार में सीनियर विधायक के खास रहे और करोडो के वारा न्यारा करने के आरोप भी लगे। उनके विवादित फैसलों को लेकर लोग अब मुखर हो रहे है।
पहली प्राथमिकता कार्यकर्ताओ को-
अपने नेता को चुनाव जीतवाने, दिन रात मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओ को खुश रखना जनप्रतिनिधिओं का धर्म होना चाहिए, पर आम तौर पर ऐसा नहीं हो पाता। सत्ता और संघर्ष के साथी अलग अलग होते है, पर एक धाखड़ नेता के यहाँ शायद ऐसा नहीं है। विभाग में करीब 10 करोड़ का काम निकला तो प्राथमिकता जान छिड़कने वाले कार्यकर्ताओ को दी गई। बाहरी सप्लायरो को ना कहते हुए देव तुल्य कार्यकर्ताओ को महत्त्व दिया गया। इसके पीछे की रणनीती चाहे जो भी हो पर कार्यकर्त्ता खुश है। ये तरीका नए के साथ साथ पुराने मंत्रियो को भी सीखना चाहिए, जो मंत्री बनते ही सप्लायर और ठेकेदारों के चंगुल में फंस जाते है।
जेल में बदला माहौल-
केंद्रीय जेल रायपुर में पिछले दिनों गृह मंत्री ने निरिक्षण किया। जेल के हर महत्वपूर्ण जगहों में गए और सुधार के लिए निर्देश दिया। मंत्री के दौरे से आम कैदियों को खाने और अन्य सामानो को लेकर राहत मिली होगी पर कुछ महत्वपूर्ण कैदियों की हालत ख़राब हो गई होगी। एक समय जिसके इशारे से जिलों के कलेक्टर और एसपी बदल जाते थे, गाड़ी फंसने पर आसपास के दुकानों को निगम प्रशासन महीनो बंद करवा देता था, उनकी क्या स्थिति हुई होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है।
शैलेश नितिन की वापसी-
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए वार रूम बनाया है, और संचार विभाग के प्रभारी का जिम्मा पूर्व प्रवक्ता शैलेश नितिन को दिया है। शैलेश नितिन पूर्व में कांग्रेस संचार विभाग के मुखिया और फिर पाठय पुस्तक निगम के अध्यक्ष रहे। लिखने पढ़ने और वाकपटुता में माहिर में शैलेश इन दिनों संचार विभाग से दूर थे तो एक यूट्यूब चैनल में कांग्रेस की बात करते थे। अब लोकसभा चुनाव के लिए बने मीडिया सेल के प्रभारी बनाये जाने के साथ उनकी संचार विभाग में वापसी की चर्चाये तेज हो गई है।
उम्मीदों को झटका-
सरकार में मंत्री पद की उम्मीद लगाए नेताओ को पहले झटका तो हारे और निराश नेताओ को लोकसभा से उम्मीदे थी। सोचे थे चुनाव लड़कर केंद्र में कुछ मिल जाए पर यहाँ भी झटका लगा है। एक दिन पहले जारी हुए लोकसभा चुनाव के संयोजक और प्रभारियों की सूची देखकर तो यही कहा संहा जा रहा कि मौका नहीं मिलेगा और पार्टी 2019 की तरह काम करेगी।
 ‘फरियादियों को ना ‘
पर्यावास विभाग में एक अफसर है जो सिर्फ उद्योगपतियों से मिलते है, आम व्यक्ति अगर कोई शिकायत या फरियाद लेकर पहुंचे तो उन्हें वॉचमैन ‘साहब’ के ब्यस्त होने की जानकारी देकर विदा कर देते है। पिछले दिनों कुछ लोग अधिकारी से फ़रियाद करने पहुंचे थे,  वॉचमैन ने कारण ने पूछा और अधिकारी के व्यस्त होने की बता कर विदा कर दिया। गुस्से से तमतमाए लोगो ने मूल फ़रियाद छोड़ अधिकारी की शिकायत उच्चाधिकारियों से कर डाला। बताते है कि अधिकारी पूर्व मंत्री अकबर का बेहद करीबी थे, मतलब एकदम करीबी। सभी औद्योगिकी इकाइयो को लाइन अप करने की जिम्मेदारी उन्ही की थी, तो विभाग में एकछत्र राज था। अपने हिसाब से जूनियर इंजीनियरों को आरओ बनाकर बैठा दिया, जो आज भी जमे है। तो पूर्व मेंबर सेक्रेटरी के इतने करीबी थे कि वे जूनियर होने के बाद भी उसे अपना उत्ताधिकारी बताते थे।

 

चौपाल चर्चा: छत्तीसगढ़ की राह पर राजस्थान सरकार, पत्नी जेल में, पति छुट्टी पर… और किलोल की चर्चा, स्वतंत्र बोल का साप्ताहिक कॉलम।

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