चौपाल चर्चा: मंत्रियो की मंत्रालय से दूरी, एसोसिएट प्रोफ़ेसर की छुट्टी और किस्सा महिला मड़ई का।

राहुल गोस्वामी
चौपाल चर्चा, 17 जून 2023.
मंत्रालय से दूरी-
सरकार के अधिकांश मंत्रियो की मंत्रालय महानदी भवन से दूरी बनी रही। साढ़े चार साल के कार्यकाल में अधिकांश मंत्री महानदी भवन नहीं गए और अगर पहुंचे भी तो गिनती के दिन। साढ़े चार वर्षो के कार्यकाल में दो साल तो कोरोना संक्रमण रहा, पर उसके पहले और बाद भी मंत्रियो ने महानदी जाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। बैठकों से लेकर सारे काम बंगले से संचालित होते रहे। मंत्रालय के मंत्री ब्लॉक में छाई वीरानी का कारण भी यही है। अब चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई तो शायद ही कोई मंत्री, मंत्रालय की सीढिया चढ़े। अब तो वे राजधानी से ज्यादा क्षेत्र में दिखते है।

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दुष्कर्मी पाठक..
दुष्कर्म केस में सस्पेंड रहे आईएएस जनक पाठक की मेन स्ट्रीम में वापसी हो गई है। सरकार ने उन्हें आवास एवं पर्यावरण विभाग का विशेष सचिव (स्वतंत्र प्रभार) बनाया था, अब उन्हें आबकारी का जिम्मा भी सौप दिया है। पाठक दुष्कर्म केस में फंसने के बाद सस्पेंड रहे। धीरे से समय ने करवट बदली और एक बार फिर मुख्य धारा में लौट आये है। उस केस का अभी तक निराकरण नहीं हुआ है, उसके बाद भी बड़ी जिम्मेदारी सरकार ने देकर भरोसा जताया है। पाठक पर जांजगीर कलेक्टर रहते कलेक्टर चेंबर में भी एक महिला से रेप का आरोप लगा था। उनका व्हाट्सप चैट भी सामने आया था, जिसमे महिला से जुडी अपेक्षाएं सार्वजनिक हुई थी।
एसोसिएट प्रोफेसर की छुट्टी-
पत्रकारिता विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद अली के बर्खास्तगी प्रस्ताव पर कार्य परिषद् ने मुहर लगा दिया है। शाहिद अली पत्रकारिता विश्वविद्यालय में शुरुआत से जुड़े हुए है, उनकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभवी संबंधी प्रमाण पत्रों में फर्जीवाड़े की चर्चा रही। गंभीर धाराओं में अपराध भी पंजीबद्ध हुआ और अब अंततः उन्हें बर्खास्त करने का प्रस्ताव पारित हो गया है। कुछ दिनों पूर्व हुई आपात बैठक में निर्णय लिया गया है, हालाँकि अभी बर्खास्तगी का आदेश जारी नहीं हुआ है। डॉ. अली ने गुरुघासीदास विश्वविद्यालय का फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति पाया था। इस कार्यवाही के बाद अभी और भी कई बड़ी कार्यवाही होने के संकेत है।
सचिव का आदेश रद्दी में !
उच्च शिक्षा विभाग में तत्कालीन सचिव रहे भुवनेश यादव ने संचालनालय में लंबे समय से अटैच एक असिस्टेंट प्रोफ़ेसर को उसके मूल पद में वापसी करने का आदेश जारी किया था, पर दुस्साहस देखिये की दो महीने बाद भी एपी अब तक कुर्सी से फेविकोल के घोल से चिपका हुआ है। इस दौरान मंत्रालय से तीन बार रिमांडर भी जारी हुआ पर संचालनालय में बैठे जिम्मेदारों ने फाइल ऐसा दबाया कि मिल नहीं रहा है। दरअसल एपी को रिलीव नहीं करने के पीछे एक सीनियर अफसर और सप्लाई लाइन की लॉबी काम कर रही है और अब तो उच्च शिक्षा सचिव भी बदल गए है तो उन अधिकारियो की पौ बारह हो गई है।
तू डाल डाल, मै पात पात-
मनेन्द्रगढ़ के विधायक डॉ. विनय जायसवाल ने विरोधी पार्टी के नेता के कारगुजारियों से पर्दा राजधानी में प्रेस वार्ता लेकर हटाया। विधायक ने आरोप लगाया कि “विधायक रहते नेता 100 एकड़ से अधिक सरकारी जमीनों का फर्जी वनाधिकार पट्टा बनवा लिया और कब्ज़ा कर लिया।” अब इसके पीछे की कहानी समझिये.. विनय जायसवाल आँखों के डॉक्टर है, वे दूर की चीजों को अच्छे से देखते है। बीजेपी नेता श्याम बिहारी जायसवाल और विनय जायसवाल एक ही समाज से आते है। पहले श्याम बिहारी जायसवाल विधायक रहे, अब विनय जायसवाल। दोनों का काम पैरलल चल रहा है, और अब दोनों एक दूसरे के खिलाफ मुखर है.. पर अंदरूनी खबर कुछ और ही है, जिस पर बात कभी और होगी।

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महिला मड़ई से फायदा, किसका?
राजधानी में  फरवरी में महिला मड़ई का शानदार आयोजन किया गया। प्रदेश भर से महिलाओ को बुलाया गया था, महिला सशक्तिकरण की बाते, छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक और अन्य प्रोग्राम भी। छह दिनों के आयोजन में विभाग ने करोडो रुपये खर्चे, पर इसका कितना लाभ महिलाओ और आंगनबाड़ी वर्कर्स को मिला.. अब तक अनुत्तरित है। बताते है कि आम महिलाओ से ज्यादा लाभ आयोजकों को हुआ है। बेहद सफाई से नोटशीट लिखी गई पर चूक तो चूक है। संबंधित अधिकारी ने अपना कलम बचाने अधीनस्थ दो सीडीपीओ का सहारा लिया, और अपने कारनामो में उन्हें भी शामिल कर लिया।
डीकेएस में मरीज बेचैन-
राजधानी का डीकेएस अस्पताल कहने को तो सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है पर अभी मरीजों की हालत ख़राब है। वहा ईलाज कराने जाने पर लोग बीमार पड़ रहे है। दरअसल अस्पताल में ओपीडी में पहुंचे मरीजों के लिए गर्मी से निजात की व्यवस्था नहीं है, लॉबी और हाल में सेंट्रल एसी तो है पर वर्षो से बंद है। जिससे ओपीडी में ईलाज कराने पहुंचे मरीज और बीमार हो रहे है। प्रबंधन की माने तो लॉबी और हाल की एसी कभी चालु ही नहीं गई, क्योकि एसी की क्षमता नहीं है। ऐसे में पूरा ध्यान आईसीयू, आईआईसीयू और वार्डो में भर्ती मरीजों पर केंद्रित है जिसे एसी की सुविधा दी गई है। सुनते है कि पूर्व में जारी विवाद और सीजीएमएससी को बकाया के चलते सीजीएमएससी ध्यान नहीं दे रहा। बजट का अभाव हो सकता है और जब स्टाफ के लिए कूलर लग सकता है तो मरीजों को सीलिंग फेन की हवा दी ही जा सकती है.. ताकि आम लोगो का सेहत और डीकेएस की छवि ख़राब ना हो।

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