चौपाल चर्चा: छत्तीसगढ़ की राह पर राजस्थान सरकार, पत्नी जेल में, पति छुट्टी पर… और किलोल की चर्चा, स्वतंत्र बोल का साप्ताहिक कॉलम।

राहुल गोस्वामी
चौपाल चर्चा, 05 अगस्त 2023.
छत्तीसगढ़ की राह पर राजस्थान-
राजस्थान सरकार भी छत्तीसगढ़ सरकार के नक़्शे कदम पर चलने लगी है। राजस्थान सरकार भी अब अपने ग्रामीण खेलो को प्रोत्साहित करने ओलंपिक का आयोजन कर रही है। देश, प्रदेश के सभी नामचीन अखबारों में इसका प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थानीय खेलो को प्रोत्साहित करने छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसका आम लोगो पर व्यापक असर हुआ है। इससे प्रभावित होकर अब राजस्थान सरकार भी अपने खेलो के माध्यम से लोगो को जोड़ने में जुट गई है। राजस्थान सरकार छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के काम से बेहद प्रभावित है, ऐसे में कुछ समय पहले यहाँ के अफसरों को प्रचार प्रसार का तकनीक समझने राजस्थान बुलाया था। यहाँ के अफसरो का प्रेजेंटेशन सीएम गहलौत को काफी पसंद आया था।
कार्यकारिणी अब तक नहीं.. 
मोहन मरकाम को रिप्लेस कर सांसद दीपक बैज को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष 12 जुलाई को बनाया गया था। श्री बैज ने 15 जुलाई को राजीव भवन में विधिवत पीसीसी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला और उसके बीस दिनों बाद भी कार्यकारिणी का विस्तार नहीं हो पाया है। अध्यक्ष के कार्यभार के दौरान चर्चा थी कि नाम और प्रोफाइल फाइनल है, बस अनुशंसा की देरी है, जैसे ग्रीन सिग्नल.. मिला लिस्ट जारी हो जाएगी। अब बैज को अध्यक्ष बने महीना भर होने जा रहा और कार्यकारिणी का अता -पता नहीं है, ऐसे में अंदरूनी खाने इसकी चर्चा होने लगी है कि जब सब कुछ फाइनल था तो फिर लिस्ट क्यों रुक गई?

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पत्नी जेल में, पति छुट्टी पर...
आईएएस रानू साहू कोल लेवी वसूली मामले में बीते सप्ताह भर से जेल में है। उन पर बेहद गंभीर आरोप है और ईडी की बहुत कोशिशों के बाद उनकी गिरफ्तारी हो पाई है। उधर उनके आईएएस जयप्रकाश मौर्या छुट्टी पर है। मौर्या 14 अगस्त तक छुट्टी पर है, और छुट्टी आगे बढ़ भी सकती है। ईडी ने आईएएस दंपति दोनों से कई दौर की पूछताछ की है।
आईएएस को संविदा-
आखिर कार सीनियर आईएएस अमृत खलको को रिटायरमेंट के अगले दिन संविदा नियुक्ति मिल ही गई। खलको का 31 जुलाई को रिटायरमेंट हुआ था और उसके एक दो दिन पहले उन्हें समाज कल्याण विभाग का सचिव बनाया था। आदेश निकला तभी स्पष्ट हो गया था कि सरकार खलको के अनुभव का लाभ लेना चाहती है। अमृत खलको के पहले डॉ. आलोक शुक्ला और डीडी सिंह को संविदा नियुक्ति दी गई थी। एक समय था जब विपक्षी पार्टियां संविदा नियुक्ति का विरोध करती थी।
समाज कल्याण का पंकज-
सप्ताह भर पहले आईएएस अधिकारियो के तबादले और विभागों में बदलाव की सूची निकली तो समाज कल्याण के संचालक का अता पता नहीं था, मतलब पूर्व संचालक रहे रमेश शर्मा को सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन का नियंत्रक बनाया पर समाज कल्याण का जिक्र नहीं हुआ। कुछ लोगो ने इसे लिपिकीय त्रुटि माना पर ऐसा.. पहली बार नहीं है। इससे पहले महिला बाल विकास के सचिव का नाम छूट गया था, विभागीय कर्मी ढूंढते रहे कि सचिव कौन बना ? वही हाल समाज कल्याण वाले आदेशों के साथ था। समाज कल्याण की जिम्मेदारी जिसे भी मिले पर विभाग का पंकज संभवतः कभी नहीं मुरझायेगा।
सब एक साथ जेल में-
राजधानी का सेन्ट्रल जेल इन दिनों चर्चा में है। वह एक साथ बड़े नामचीन और रसूखदार लोग एक साथ बंद है। आईएएस समीर बिश्नोई, रानू साहू, सौम्या चौरसिया, अशोक चतुर्वेदी, सूर्यकांत तिवारी, सुनील अग्रवाल, अरुणपति त्रिपाठी सहित दर्जन भर से अधिक प्रभाव शाली। सभी के तार एक दूसरे से जुड़े है।
किलोल की चर्चा-
मौजूदा सरकार के अंतिम सत्र में विधानसभा में किलोल पत्रिका की चर्चा हुई। चर्चा भी हल्की नहीं, बेहद गंभीर। अपने सधे अंदाज में बीजेपी विधायक ने सवाल उठाया तो पंडित जी को जवाब नहीं सूझ रहा था। यह सही है कि किलोल की शुरुआत एक सीनियर आईएएस ने किया था, स्कूलो के शिक्षकों को सदस्य बनाकर करोडो रुपये धनार्जन भी किया गया। बाद में साहब ने किलोल की ओनरशिप किसी कंपनी को दिया था। बाकायदा फेसबुक में इसके बारे में लिखा भी, पर लोग अब भी यह मानने को तैयार ही नहीं है, और सीनियर आईएएस को स्वामी बताने पर तुले हुए है।
…तो बाकी क्या कर रहे थे ?
शिक्षकों के ट्रांसफर पोस्टिंग और संशोधन में लेन देन और भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने एक साथ दस अफसरों को सस्पेंड कर दिया। तीन संयुक्त संचालक, तीन सहायक संचालक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और लेखपाल को निपटा दिया। स्कूल शिक्षा विभाग में अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही है, जिसके बाद से पूरा महकमा हिला हुआ है। अब जनचर्चा है कि जब इतना बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा था तब सीनियर अफसर क्या कर रहे थे, उन्होंने समय रहते ध्यान क्यों नहीं दिया और अचानक अफसर नींद से कैसे जागे ? कोई भी फाइल नीचे से ऊपर तक जाती है तब सज्ञान क्यों नहीं लिया गया..और अगर शिक्षा विभाग में ऐसा नहीं हुआ तो फिर हो कैसे रहा था। पूरी कार्यवाही को दो डिप्टी कलेक्टरों की प्रतिनियुक्ति और फिर हाईकोर्ट से मिले स्टे से जोड़कर देखा रहा है। अब मामला चाहे जो भी हो किरकिरी तो विभाग की हो रही है।
खर्चे और कोशिशों के बाद निराशा-
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नैक एक्रेडेशन के जी जान लगा दिया था। कर्मियों को छुट्टियों के दिन भी बुलाया गया और वृहद् स्तर पर तैयारी की गई थी। खुद कुलपति डॉ शुक्ला एक एक विभाग की जानकारी लेते रहे, बारात स्वागत की तरह तैयारी की गई थी। खुद का गेस्ट हाउस के बजाए  बारातियो (नैक टीम) को एक बड़े होटल में ठहराया गया था, और बेहिसाब खर्च किया गया ताकि परिणाम सकारात्मक रहे और जब परिणाम आया तो कुलपति सहित प्रबंधन को निराशा हाथ लगा। पता चला कि विगत पांच वर्षो से नैक टीम विजिट नहीं की थी, पूर्व में प्रबंधन ने शोध और रचनात्मक कार्यो की जगह की सिविल वर्क को प्राथमिकता में रखा था।
भारत माला की फिर शिकायत-
भारत माला प्रोजेक्ट में भू अर्जन और मुआवजा वितरण में बड़ा खेल हुआ है। अब एक सीनियर विधायक ने फिर कलेक्टर को शिकायतों का पुलिंदा सौपा  कि एसडीएम ने सब गड़बड़ कर दिया, इसकी जाँच करवाइये। जब सत्ता पक्ष के सीनियर विधायक को कलेक्टर को ऐसा कहना पड़े तो मामले की गंभीरता को समझा जा सकता है। इससे पूर्व भारत माला प्रोजेक्ट में भू अर्जन और मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की जाँच पूरी हो गई है, मामला विधानसभा तक पहुंचा था। बताते है कि राजस्व अफसरो और जमीन दलालो ने सिंडिकेट बनाकर करोडो का वारा न्यारा किया है।

 

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