चौपाल चर्चा: महिला बाल विकास का पिकनिक, पद्म भूषण से जेल तक.. और चुनावी मोड़ पर सरकार, स्वतंत्र बोल का साप्ताहिक कॉलम।

राहुल गोस्वामी
चौपाल चर्चा 24 दिसंबर 2022.

 

ताकतवर कुर्सी से जेल तक-
सरकारी या गैर सरकारी महकमे में एक कुर्सी बेहद ताकतवर होती है, उसमे बैठने वाला व्यक्ति भी ताकतवर हो जाता है। अब जब तक दुसरो को ताकत का एहसास न कराये तो लोग उन्हें ताकतवर कैसे समझे, और यही ढलान की शुरुआत होती है। एक दिन पहले आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रमुख और पद्म भूषण से सम्मानित चंदा कोचर को सीबीआई ने उनके पति के साथ गिरफ्तार किया। चंदा पर आरोप है कि उन्होंने बैंक के सर्वोच्च पद पर रहते हुए वीडियोकॉन कंपनी को गलत तरीके से 3000 करोड़ से अधिक का लोन दिया और आर्थिक लाभ लिया। जाँच पड़ताल से उनकी कुर्सी चली गई और एक दिन पहले उनकी गिरफ्तारी भी हो गई। झारखण्ड की आईएएस पूजा सिंघल, बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले के आरोपित आईएएस सजल चक्रवर्ती, छत्तीसगढ़ की सौम्या चौरसिया सहित अनेको नाम ऐसे है जो ताकतवर कुर्सी में रहे। इनकी तूती बोलती थी पर आज विपरीत परिस्थिति का सामना कर रहे है। सरकारी महकमे और संवैधानिक पदों पर बैठने वाले अधिकारियो को इन घटनाओ से सबक लेनी चाहिए क्योकि कागज कभी नहीं मरता।
महिला बाल विकास का ‘पिकनिक’
महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियो का अलग ही जलवा है, वे जहाँ भी जाते काम के साथ साथ पिकनिक भी मना लेते है। कुछ दिन पहले संचालक समेत पूरा संचालनालय का पूरा प्रशासनिक अमला बलौदा बाजार जिले के दौरे पर गए। वहां संचालक ने जिले में विभागीय योजनाओ की स्थिति का जायजा लिया। बताते है कि अधिकांश अधिकारी सरकारी गाड़ी की बजाये किराये की गाडी से पहुंचे थे। 90 किलोमीटर की दुरी तय कर पहुंचे कुछ अफसरों ने रेस्ट हाउस में थकान मिटाया तो एक अफसर बारनवापारा पहुंच गए रेस्ट करने। संचालक की सोच ठीक हो सकती है कि मौके पर जाकर हक़ीक़त देखा और समझा जाए, पर इसका परिणाम भी सामने आना चाहिए। इससे पहले संचालक सहित पूरा अमला बस्तर, रायगढ़ का दौरा कर चुके है। बस्तर में दौरे और समीक्षा बैठक के परिणामो की बजाये अधिकारियो के बोटिंग, सैरसपाटा और खानपान की चर्चा ज्यादा रही। वही रायगढ़ में सभी के रुकने के लिए होटल बुक किये गए थे।
करोडो का मोबाइल-
महिला बाल विकास विभाग द्वारा साल 2018 में विधानसभा चुनाव के कुछ महीने पहले करीब 16 करोड़ का मोबाइल फ़ोन ख़रीदा था। तत्कालीन संचालक ने नियमो को दरकिनार कर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया। मोबाइल सप्लाई हो गई पर भुगतान न हो सका। खरीदी के बाद मोबाइल वितरण नहीं होने और भुगतान अटकने की जानकारी पर साल 2019 में एसीएस की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जाँच कमेटी बनाई गई। कमेटी ने तीन साल बाद रिपोर्ट सब्मिट किया तो पता चला इसके लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है, और फाइल भुगतान के बढ़ाया गया। लेकिन अब तक भुगतान नहीं हो पाया है। बताते है कि फाइल में लिखे शब्दों को देखकर अधिकारी कलम चलाने से घबरा रहे है। उधर चार सालो से हजारो की संख्या में मोबाइल में गोदाम में डंप है। एक बार फिर विभाग करोडो की लागत से मोबाइल खरीदने में जुटा हुआ है।
अब कॉलेजों में दिखेंगे प्रोफ़ेसर-
उच्च शिक्षा आयुक्त के नए आदेशों के बाद तफरीह करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर्स और प्रोफेसर्स अब कॉलेजों में दिखेंगे। आदेशों के अनुसार उन्हें सात घंटे कॉलेज में बिताने होंगे और अध्यापन में ध्यान देना होगा। देखा गया था कि अधिकांश अध्यापक अपने मूल कामो को छोड़ देश दुनिया के हालातो को लेकर ज्यादा चिंतित रहते थे। वे क्लास में कम और बैठकों में ज्यादा नजर आते थे, इससे शिक्षा का स्तर नाम के विपरीत दिशा में जा रहा था। ऐसे में उच्च शिक्षा आयुक्त को कड़ा आदेश निकालना पड़ा, जो सबके लिए अच्छा है।
अब चुनावी मोड़ पर सरकार-
विधानसभा चुनाव को दस महीने का समय शेष है, राजनीतिक पार्टिया और उनसे जुड़े लोग अब कमर कस तैयारी में जुट गए है। उधर सरकार भी इलेक्शन मोड़ पर है, मुख्यमंत्री ने भेंट मुलाकात कर 50 से अधिक विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर लिया है। आने वाले दिनों में बचे विधानसभा भी देख लिए जायेंगे। अब इधर बनने वाली योजनाए और फैसले चुनावी होंगे।

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