राहुल गिरी गोस्वामी
चौपाल चर्चा, 27 नवंबर 2022.
अधिकारियो को मुर्गा-
प्रदेश में कोल परिवहन में गड़बड़ी की जाँच में जुटी प्रवर्तन निदेशालय की टीम कारोबारियों और अधिकारियो से मारपीट कर रही, उन्हें मुर्गा बना रही है। इस बात का खुलासा स्वयं सीएम भूपेश बघेल ने किया है। सीएम के खुलासे के बाद लोग हैरान है तो जिन्हे समन जारी हुआ वो बेहद डरे हुए है। ऐसे मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद लोग जानकारी लेने में जुटे है। इससे पूर्व भी ईडी की नोटिस और पूछताछ के तरीके को लेकर अलग अलग बाते सामने आई थी, पर वह स्पष्ट नहीं था। अब सीएम के ट्वीट के बाद वे बाते सही हो गई है। प्रदेश में बीते ढाई महीनो से जमीं ईडी की टीम अभी तक चार लोगो को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, खनिज विभाग के दो अधिकारियो के गिरफ्तारी की चर्चा है। ऐसे मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद उन लोगो की धड़कने बढ़ गई जिन्हे अभी पूछताछ होना बाकी है।
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विशेष सचिव की फ़रियाद-
एक सरकारी विभाग के विशेष सचिव अपने विभागीय कर्मियों और मातहतों से परेशान है। दरअसल साहब को ओहदे के अनुरूप अधिकारी तव्वज्जो नहीं दे रहे, जैसा उन्हें मिलना चाहिए.. जिससे अधिकारी परेशान रहते है। महीने भर उनके कनिष्ठ अधिकारी ने उनके चेंबर में बदसलूकी कर दी, फाइलें टेबल फेंक दिया… जब यह घटनाक्रम हुआ तो कुछ पत्रकार भी वहां मौजूद थे। अनायास हुए इस बर्ताव साहब झेंप गए, उन्होंने उक्त विभाग से अपने को अलग करने या कनिष्ठ अधिकारी को हटाने का निवेदन करते हुए शिकायत पत्र विभागीय सचिव और जीएडी सचिव से की। विभागीय सचिव ने फाइल आगे बढ़ा दी, अब तक दोनों में से एक भी ना हुआ.. ऐसे में जीएडी ने क्या किया बताने की जरुरत नहीं है। अधिकारियो द्वारा निर्णय न करने पर अधिकारी ने खुद को अलग कर लिया है, उक्त विभाग ना फाइल देख रहे ना किसी विभागीय काम में शामिल रहे। इस घटना के कुछ महीने पहले एक संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी ने उन्हें फ़ोन में अप्रिय बाते कह दिया था, जिससे साहब नाराज हुए। खांटी छत्तीसगढ़िया टाइप के अधिकारी ऐसे बर्ताव से परेशान है।
अरमानो पर फिरा पानी-
इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति की योजना खटाई में पड़ गई है। ऐसे में उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन किया पर उनका आवेदन रिफ्यूज कर दिया गया। दरअसल उनके खिलाफ शिकायतों की लंबी फेहरिश्त है, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत पर जाँच जारी है। पद में रहते साहब ने नियम कानूनों की परवाह न करते हुए एकसूत्रीय कार्यक्रम चलाया था, अब उनकी चाहत कुछ और थी। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उन्हें एनओसी देने से इंकार कर दिया, जिसके बाद उनके द्वारा बनाई योजना खटाई में पड़ती दिख रही है। जानकार कहते है कि साहब वीआरएस लेकर पुरानी जाँच पड़ताल से छुटकारा चाहते थे ताकि भविष्य में किसी विश्वविद्यालय में कुलपति बनने की संभावनाएं भी बनी रहती।
चाय से ज्यादा केतली गरम-
राजधानी के विश्वविद्यालयो के कुलपति से मिलना उतना ही कठिन जितना राष्ट्रपती से। आप राज्यपाल से बड़ी आसानी और सहजता से मिल सकते है पर कुलपति से नहीं। यह हाल प्रदेश के उन विश्वविद्यालयो का जहाँ की कुलाधिपति ने आम लोगो के लिए राजभवन के दरवाजे खोल दिए है। बीते दिनों ने कुछ लोगो ने पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलने के लिए कुलपति सचिवालय में पदस्थ कर्मियों से समय मांगा। अब कर्मियों की जिम्मेदारी थी कि वे इस बता कुलपति को अवगत कराते फीडबैक को संबंधितो को सूचित करते..पर हुआ उल्टा। सचिवालय में पदस्थ कर्मी ने संबंधितो को कुलपति से मिलने के पहले कुलसचिव से मिलने का निर्देश दिया। ऐसा कही लिखा तो नहीं कि कुलपति से मिलने से पहले कुलसचिव से मिलना आवश्यक है। ऐसे छोटे छोटे वाकये होते है जो कुलपति या ओहदेदार लोगो की बनी बनाई इमेज का कबाड़ा कर देते है।
निरंकुश महिला बाल विकास-
महिला बाल विकास विभाग नियंत्रणविहीन हो गया है। गड़बड़ी, अनियमितता तो पहले भी रही पर ऐसी स्थिति कभी नहीं थी, अभी स्थिति चरमरा सी गई है। गड़बड़ी और फजीहत के बाद भी उन्ही लोगो को जिम्मेदारों दी गई जो विभाग की फजीहत कराने में जुटे हैं। पूर्व में रहे सचिवों ने विभाग प्रमुख और संचालनालय के अफसरों को टाइट कर रखा था। पूर्व सचिव रही सीनियर आईएएस शहला निगार ने सहायक संचालक स्तर के अफसरो को जमकर फटकार लगाया था, स्थिति ऐसी थी की उनसे मिलने से पहले संचालनालय के अधिकारी सोचते थे। तेजतर्रार आईएएस रीना बाबा साहेब कंगाले ने सचिव रहते ऐसे अफसरों को मंत्रालय में फटकने भी नहीं दिया। अधिकारियो के बदलने के साथ स्थिति भी बदल गई है, ऐसे वैसी ही सख्ती फिर जरुरी महसूस की जा रही है। उच्च शिक्षा में निर्भीकता से आदेश जारी करने वाले सीनियर आईएएस भुवनेश यादव को महिला बाल विकास में भी ध्यान देना चाहिए।
क’मंडल से संपत्ति का इजाफा-
एक मलाईदार मंडल के अध्यक्ष की इन दिनों चहुंओर चर्चा है। चर्चा का कारण चुनाव की तैयारी और मंडल से निकलते अनाप शनाप बिल है। दरअसल नेता जी जुगाड़ लगाकर एक मलाईदार मंडल के अध्यक्ष बन गए, सरकार से कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिल गया.. जिसके बाद अध्यक्ष धड़ल्ले से जमीन जायदाद खरीद कुनबा बढ़ाने में जुटे है। घर के आसपास घर और खाली जमीनों को खरीद क्षेत्रफल का विस्तार भी कर डाला, तो छद्म नामो से खुद काम कर रहे है। महीने में करोडो का भुगतान सिर्फ प्रचार प्रसार में हो रहा, जिसे ना तो कोई देखने वाला ना ही कोई समझने वाला। नेता जी विधानसभा चुनाव की तैयारी भी कर रहे, तो विरोधी हिसाब बना रहे है। चुनावी साल में छोटा सा आरोप भी भारी नुकसान पहुंचाता है।
