चौपाल चर्चा: आईजी दो ऑफिस एक, चुनावी तैयारी शुरू.. जेल पहुंचते ही बिगड़ी सेहत,, तो दोबारा कुलपति बनने की चाहत, स्वतंत्र बोल का साप्ताहिक कॉलम।

 

राहुल गिरी गोस्वामी

चौपाल चर्चा, 19 नवंबर 2022.

अवस्थी की वापसी-
राज्य सरकार ने एक दिन पहले पुलिस विभाग में बड़ा बदलाव करते हुए आधी रात आदेश जारी किया। जिसमे चार रेंज के आईजी बदले गए तो सबसे बड़ी खबर रही डीजीपी दुर्गेश माधव अवस्थी की में स्ट्रीम में वापसी। दुर्गेश माधव अवस्थी करीब साल भर पहले पुलिस महानिदेशक पद से हटाए गए थे, तब अनेक चर्चाये थी। साल भर तक साइड लाइन में रहने के बाद सरकार ने उन्हें एसीबी और ईओडब्लू का चीफ बनाया है। दुर्गेश माधव अवस्थी परिणाम देने वाले अफसर है, पुलिस महानिदेशक रहते कई बड़े निर्णय पुलिस सुधार के लिए लिए थे। अवस्थी की वापसी के साथ चारो रेंज, खासकर रायपुर रेंज में स्थाई आईजी की पोस्टिंग के साथ सरकार ने चुनावी तैय्यारी शुरू हो गई है। जिन अफसरों को सरकार ने जिम्मेदारी दी सभी रिजल्ट ओरिएंटेड माने जाते है।
राजधानी में फोकस-
प्रदेश में कानून व्यवस्था खासकर राजधानी में बढ़ती घटनाओ और अपराधों को लेकर बीजेपी सरकार पर आरोप लगा हावी होती रही है। पुलिस की गस्ती और कप्तान के सडको पर निकलने के बाद में राजधानी में क्राइम का ग्राफ बढ़ा है, चाकूबाजी की घटनाओ ने पुलिस के नाक में दम कर रखा है। ऐसे में चुनावी साल में सरकार का पूरा फोकस कानून व्यवस्था की चाक चौबंद और व्यवस्था दुरुस्त करने में होगा। इसकी शुरुआत एक दिन पहले निकले आदेश में नजर आता है। सरकार ने रायपुर पर विशेष फोकस करते हुए रायपुर रेंज को दो भागो में बांटा है जिसमे एक आईजी रेंज के अन्य छोटे जिलों को देखेंगे तो दूसरे इंटेलिजेंस के साथ पूरा फोकस राजधानी की क्राइम कंट्रोल पर करेंगे। रेंज में दो आईजी बिठाने के बाद कानाफूसी हो रही थी दूसरे रेंज आईजी की बैठक व्यवस्था कहा होगी।

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पुराने चेहरे पर भरोसा-
बीजेपी में नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, मोर्चा प्रकोष्ट और जिलों के अध्यक्ष बदलने के बाद कारकार्यताओ में उत्साह दिखा। नए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओ को लग रहा था पुराने वालो के दिन गए, पर ऐसा दिख नहीं रहा। भानुप्रतापुर चुनाव में बीजेपी ने दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल को चुनाव संचालन का जिम्मा सौपा है। बृजमोहन मैनेजमेंट में माहिर माने जाते हैं, ऐसे में पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा किया है। जिससे उन लोगो को थोड़ा झटका जरुरु लगा होगा जो चहरे परिवर्तन के बाद ज्यादा उम्मीद पाले हुए थे।
दो दर्जन आरोपों पर जाँच लंबित-
प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय में दस वर्षो तक कुलपति रहे डॉ. एस. के पाटील ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। डॉ पाटिल की सेवा अभी तीन वर्ष शेष है उसके पहले ही वे वीआरएस ले रहे है। डॉ. पाटिल पर विश्वविद्यालय के दस वर्षो तक कुलपति रहे, तीसरी की कोशिश में जुटे थे। उसके लिए जमकर मेहनत और प्लानिंग की पर भाग्य ने इस बार साथ नहीं दिया। कुलपति रहते डॉ पाटिल पर आर्थिक अनियमितता के अनेको गंभीर आरोप लगे, अधिकांश खानापूर्ति कर फाइल बंद कर दी गई। बताते है कि उनके खिलाफ दो दर्जन से अधिक शिकायते थी जिसकी सही जाँच हो तो वे मुश्किल में पड़ सकते है। कुछ लोगो ने आरटीआई से दस्तावेज मांगा है।
दोबारा ताजपोशी की फ़िराक में..
रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ केशरीलाल वर्मा का कार्यकाल अगले साल मार्च में समाप्त हो जायेगा। नए वीसी के चयन की प्रक्रियाएं तेज हो गई है, राजभवन ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। कुलपति के दावेदार एक्टिव होकर लॉबिंग में जुट गए है। तो वर्तमान कुलपति केसरीलाल वर्मा रिपीट होने के लिए प्रयासरत है, बताते है कि इसके लिए उन्होंने जोड़ घटाओ शुरू कर दिया है। वे झारखण्ड के राज्यपाल के करीबी बताये जाते है। उन्हें वर्मा फैक्टर का लाभ मिल सकता है, पर इतना सब आसान नहीं होगा। उनके कार्यक्राल में ही रविशंकर विश्वविद्यालय के कुर्सी टेबल गाडी कुर्की होने वाली थी। विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का अड्डा बन गया, नियमो के विपरीत अपने रिश्तेदारों को करोडो का काम उन्होंने दिया, जिसके पुष्ट दस्तावेज आरटीआई से निकले गए है। ऐसे में दोबारा कुलपति बनना आसान पहले जितना आसान नहीं होगा।

 

ईडी छापेमारी का डर-
प्रदेश में ईडी की छापेमारी और जाँच लगातार जारी है। ईडी ने राजधानी के पंजीयन कार्यालय में नोटिस भेजर विगत तीन महीनो में बड़े कारोबारियों और ब्यूरोक्रेट्स के जमीन रजिस्ट्री की जानकारी मांगा है। जिसके बाद रजिस्ट्री विभाग के अफसरो और उन खरीददारों की साँस फुल गई है। ईडी बड़े बड़े कारोबारियों को सात से आठ घंटे बिठाकर पूछताछ कर रही है, राडार में आये आईएएस अधिकारियो का कई दिन ईडी कार्यालय में बीत रहा है। राजधानी सहित पुरे प्रदेश में जमीन का बड़ा खेल जारी है, अधिकारी नेता सारे जमीन पर लग गए थे। एक अधिकारी ने बेमेतरा जिले में अपने और परिजनों के नाम पर फार्महाउस लेकर खेती करना शुरू कर दिया है। साहब पर गड़बड़ी के कई गंभीर आरोप पहले भी लगे है, अब जमीन के फेर में फंस सकते है। दरअसल कुछ लोगो ने इसकी शिकायत ईडी में दस्तावेजों के साथ की है। वही एक मंत्री को किसी ने कह दिया की आपके घर में ईडी का छापा पड़ने वाला है, महिला मंत्री का गला सुख गया। आनन् फानन में व्यवस्था दुरुस्त की गई, बाद में पता चला कि मातहत अधिकारी ने किसी दूसरे को साइडलाइन करने पुड़िया छोड़ा था। तब जाकर राहत मिली।
जेल पहुंचते ही बिगड़ी सेहत-
कोयला परिवहन और मणि लॉन्ड्रिंग केस में जेल पहुंचे हाईफाई कारोबारी सूर्यकांत तिवारी की सेहत बिगड़ गई। उन्हें आनन फानन में मेकाहारा अस्पातल में भर्ती करना पड़ा है। डॉक्टर्स बीपी और अन्य कुछ बड़ी परेशानी बता रहे थे। सुनवाई के दौरान कलफदार सदरी पहने और चस्मा लगाए तिवारी की जेल जाते ही सेहत ख़राब हो गई। ेखा गया कि आम तौर पर ज्यादा सुख सुविधा में रहने वाले और राजनीतिज्ञों को जेल जाते ही सेहत ख़राब हो जाता है। ऐसे में वे अस्पताल में भर्ती होकर ईलाज कराना जरुरी समझते है। आज ही दिल्ली के जेलमंत्री का वीडियो सामने आया जिसमे उन्हें आप के अनुसार फिजियोथेरेपी दिया जा रहा था।

 

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