विश्वविद्यालय में भर्राशाही: नियमो के विपरीत अधिकारियो को मिला एरियर्स, प्रोबेशन समाप्ति में गड़बड़ी.. साल भर से रिपोर्ट दबाये बैठे जिम्मेदार

रायपुर 24 नवंबर 2022.  इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में प्रबंधन की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अधिकारियो को लाभान्वित करने नियमो की उपेक्षा कर उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचाया हैं जिससे शासन को करोडो रुपयों की क्षति हुई है। दस्तावेजों के अनुसार इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने असिस्टेंट प्रोफेसर्स को नियमो के विपरीत परिवीक्षाकाल को समाप्त किया, साथ ही उन्हें करोडो रुपये एरियर्स का भुगतान कर दिया है। इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय के कुलसचिव और कुलपति की भूमिका संदिग्ध है।

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जानकारी अनुसार विश्वविद्यालय प्रबंधन ने चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर्स को नियमो के विपरीत नियुक्ति तारीख से ही वेतनवृदि का लाभ दिया गया, वही उनकी परिवीक्षा अवधि की समाप्ति में गड़बड़ी की गई। शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा बनाई गई जाँच समिति ने गड़बड़ी की पुष्टि की है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आर्थिक अनियमितता और नियमो के उल्लंघन की शिकायत पर तत्कालीन डीन डॉ एम.पी. ठाकुर की अद्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसमे संचालक अनुसंधान सेवाएं आर. के. वाजपेयी, लेखा नियंत्रक आरपीएस चौहान,निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ एससी मुखर्जी शामिल थे। समिति ने पाया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन के करीब 40 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर्स को नियमो के विपरीत वेतनवृद्धि का लाभ दिया, उनकी परिवीक्षाधीन अवधि समाप्त की। जिससे राज्य शासन को करोडो रुपये का आर्थिक नुकसान और कर्मियों को लाभ पहुंचा।
सवालो में कुलपति और कुलसचिव..
जाँच समिति द्वारा साल 2021 में रिपोर्ट देने के एक साल बाद भी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उस पर अमल नहीं किया है। रिपोर्ट के अनुसार जिन कर्मियों को करोडो रुपये का लाभ दिया गया उनसे उक्त राशि की रिकवरी की जानी थी, वही गलत तरीके प्रोबेशन समाप्ति का लाभ लेने वाले कर्मियों को टर्मिनेट करना था, पर ऐसा कुछ नहीं है।जिम्मेदार साल भर बाद रिपोर्ट दबाये रखे। इस पुरे मामले में कुलपति और कुलसचिव की भूमिका संदिग्ध है। सरकारी धन के क्षति और अनियमितता के गंभीर विषयो पर विश्वविद्यालय प्रबंधन की स्थिति ठीक नहीं है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव जीके निर्माम ने कहा कि
“जाँच रिपोर्ट प्राप्त हुई थी, पर कार्यवाही में विलंब हुआ है.. किसी को अगर गलत तरीके से लाभांवित किया गया है तो अगले एक महीने के भीतर उनसे रिकवरी और अन्य कार्यवाही की जाएगी।”

 

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