आपराधिक प्रवृति का बिल्डर: फाइनेंस कंपनी को लगाया था 1 करोड़ का चूना, दूसरे के घरो को बताया था अपना.. फर्जी दस्तावेजों से लिया लोन।

रायपुर 18 अक्ट्रबर 2022.  राजधानी के श्रीकृष्णा वाटिका डेवलपर्स कंपनी के भागीदार राजेश आहूजा पर पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर अपराध पंजीबद्ध किया है, उस पर पहले से ही कई मामले दर्ज है। करीब एक साल पहले सरस्वती नगर पुलिस ने राजेश आहूजा और उसकी पत्नी सौम्या आहूजा पर फाइनेंस कंपनी के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में अपराध दर्ज किया गया था। उक्त केस में दोनों जमानत पर है।

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पुलिस के अनुसार राजेश आहूजा और उनकी पत्नी सौम्या आहूजा ने चोलामंडलम इनवेस्टमेंट एंड फायनेंस कंपनी के पास लोन के लिए आवेदन दिया। उन्होंने छोटा भवानी नगर कोटा में पटवारी हल्का नंबर 107 खसरा नंबर 129/2, 129/5 और खसरा 131/12, 143/81 में प्लाॅट नंबर 39, 40, 41 और 42 में बने सातो मकान अपना होना बताया था। जो आहूजा परिवार विकास आहूजा, प्रिया आहूजा , रमेश आहूजा और सुशीला आहूजा के नाम पर है। इन मकानों के एवज में राजेश आहूजा ने 1 करोड़ रुपये का लोन लिया। दस्तावेजों की फौरी जांच के बाद उन्हें 60 लाख और 40 लाख रुपए का लोन नवंबर 2019 में दिया गया।
फ़ोन बंदकर गायब-
लोन की किश्तें जमा न होने की वजह से फायनेंस कंपनी ने आहूजा परिवार के लोगों को नोटिस जारी किया, लेकिन किसी ने भी नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। कंपनी ने फ़ोन से स्थिति जानना चाहा तो सभी का फ़ोन बंद मिला। ऐसे में कंपनी ने सभी सातों मकानों को कुर्क करने के लिए मौके का निरीक्षण किया तो पता चला कि उक्त जगह पर जो मकान बने हैं वो आहूजा परिवार के हैं ही नहीं। वहां अन्य दूसरे लोगों का कब्जा है। उनके पास उन मकानों के दस्तावेज भी मौजूद हैं। कंपनी को इसके बाद ही पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। धोखाधड़ी के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद कंपनी के मैनेजर ने इसकी एफआईआर सरस्वती नगर थाने में दर्ज कराई थी।
फर्जी दस्तावेज बनाने में माहिर..
पुलिस अफसरों के मुताबिक राजेश आहूजा पर पूर्व में भी कई प्रकरण लंबित है। वह जमीन से जुड़े काम करता है, वह जमीन के फर्जी पेपर्स बनाने में माहिर है। उसने चोलामंडलम कंपनी को फर्जी पेपर्स देकर 1 करोड़ का लोन लिया और गायब हो गया। आम तौर पर कोई भी बैंक या फायनेंस कंपनी से लोन देने के पहले कंपनी प्रॉपर्टी की सर्च रिपोर्ट तैयार करवाती है। इससे पता चलता है कि असदक द्वारा दिए गए दस्तावेज सही है या नहीं। पर चोलामण्डलम कंपनी ने ऐसा नहीं किया और सीधे उसे लाओं स्वीकृत कर दिया था। इसमें कंपनी प्रबंधन की भूमिका भी संदिग्ध थी। अपराध कायम होने के बाद पति पत्नी दोनों लंबे समय तक गायब थे, बाद में पुलिस ने दोनों को पकड़ा था।

 

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