रायपुर 2 नवंबर 2022: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासी समाज के लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि राज्य सरकार उन्हें हर हाल में 32 फीसदी आरक्षण देगी। मुख्यमंत्री ने आदिवासियों की मांग पर सभी सरकारी विभागों में रोस्टर का नियमित रूप से पालन के लिए जांच प्रकोष्ठ का गठन करने की भी घोषणा की। सीएम ने कहा कि सहकारिता में हर समुदाय के लोगों को भी प्रतिनिधित्व दिलाया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने सीएम हाउस में राज्यभर से पहुंचे आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हित और उनके संरक्षण के लिए संविधान में जो अधिकार हैं, उसका पालन करने के लिए हमारी सरकार सजग होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आदिवासियों के उत्थान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
उनके आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया से परिचित कराने के लिए तीन वर्षों से लगातार राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
आरक्षण मामले में अब तक क्या-क्या हुआ
राज्य सरकार ने 2012 आरक्षण के अनुपात में बदलाव किया था। इसमें अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 20 से बढ़ाकर 32 फीसदी किया गया था। वहीं अनुसूचित जाति का आरक्षण 16 से घटाकर 12 फीसदी किया गया। इसे गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 19 सितंबर को इस पर फैसला सुनाते हुये राज्य के लोक सेवा आरक्षण अधिनियम को रद्द कर दिया। इससे आरक्षण व्यवस्था खत्म होने की स्थिति पैदा हो गई है। शिक्षण संस्थाओं में भी आरक्षण खत्म हो गया है।
गोंड, उरांव समेत कई समाज के नेता रहे मौजूद
इस अवसर पर गोंड़ समाज, उरांव, भुईंया, कंवर, मुण्डा, पंडो, मंझवार, नगेसिया, नागवंशी आदि समाजों के प्रतिनिधिमंडल में सुनऊराम नेताम, रामसाय, भानुप्रताप सिंह मरकाम, रघुनाथ, तुलसीराम, चतुर सिंह तारम, सुश्री तारा मंडावी, महावती कोमरे, शेर सिंह आचला, बाल सिंह, निलकंठ सिंह ठाकुर, पन्नालाल धु्रव, शिवप्रसाद, कौशल ठाकुर, पुनीत राम, मनोज भगत, रविन्द्र पैकरा, शरण सिंह, सोमार साय, सीताराम, बिहारी राम पैकरा, शिवराम पण्डो, बबलू कुमार, राजेश, मलकू राम, रविशंकर तथा रामचन्द्र मुण्डा आदि शामिल थे।
विशेष सत्र भी बुलाएंगे
सीएम ने कहा कि संविधान द्वारा अनुसूचित जनजाति को दिए गए सभी अधिकारों का संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए जो भी आवश्यक कदम होगा, वह उठाया जाएगा। आवश्यक हुआ तो विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर अध्यादेश भी लाएंगे।
