रायपुर 12 मार्च 2022. पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्मार्ट बोर्ड खरीदी में अनिमितता के आरोपो से घिरे कुलसचिव और उपकुलसचिव पर पूर्व में भी गड़बड़ी संबंधी चर्चाओं में रहे है। गिरीशकांत पांडेय इससे पूर्व कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलसचिव रहे। बताते है कि वहा पेयजल की समस्या होने पर रूसा मद से कुआँ खुदवाया था, दक्षिण भारतीय मजदूरों को काम पर लगाया गया था। कुछेक फिट की खुदाई होने के बाद काम बंद हो गया। बताया गया कि पैसे ख़त्म हो गए तो काम कहा से हो? अब जांच की मांग होने लगी है।
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वही उपकुलसचिव शैलेन्द्र पटेल की नियुक्ति पर सवाल उठाया जा रहा है। । चर्चा है कि शैलेन्द्र पटेल छत्तीसगढ़ पीएससी द्वारा मांगे गए 9 साल के आवश्यक अध्यापन के अनुभव को पूरा नहीं करते है, उसके बाद भी उनका चयन साल 2016 में उपकुलसचिव पद पर किया गया है। स्वतंत्रबोल के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार पटेल ने साल 2008 में आरआईटी रायपुर में सीनियर लेक्चरर पद पर चयन हुए, जिसे उन्होंने 14 जुलाई 2009 को त्यागपत्र दे दिया और अगले ही दिन 15 जुलाई को बीआईटी रायपुर में बतौर सीनियर असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ज्वाइन किया। पटेल वहा 7 मार्च 2016 तक रहे, इसी बीच उनका चयन उपकुलसचिव के लिए हो गया तो उन्होंने इस्तीफा सौपकर उपकुलसचिव बन गए। अब मसला ये है कि आयोग ने विज्ञापन के समय 9 वर्षो का अध्यापन का अनुभव माँगा था जबकि पटेल को साल 2016 में इस्तीफा देने के समय भी 9 वर्ष पूरा नहीं हुआ था। अब उस प्रक्रिया और नियमो के उल्लंघन पर लोग मुखर हो रहे है।
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