1 को राजधानी में ताकत दिखायेगा आदिवासी समाज: आरक्षण में कटौती से कोर्ट के फैसले से नाराजगी.. बीजेपी कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट

रायपुर 25 सितंबर 2022. आरक्षण को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आये फैसले के बाद आदिवासी समाज में आक्रोश है। इस फैसले के बाद समाज के पदाधिकारियों की राजधानी में दो दिनों बैठके हो रही है। जिसके बाद सर्व आदिवासी समाज ने पक्ष विपक्ष सहित सभी 32 आदिवासी विधायकों को 1 अक्टूबर को राजधानी बुलाया है। उक्त बैठक में एसटी वर्ग के लिए पूर्व निर्धारित 32% आरक्षण के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलेंगे। शनिवार को बंजारी नवा रायपुर में सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति शासकीय सेवक संघ के पदाधिकारी जुटे। हाईकोर्ट में सरकार की ओर से रखे पक्ष को समाज ने कमजोर करके आंका है। प्रांतीय अध्यक्ष आरएन ध्रुव और सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष भारत सिंह, सचिव डॉ. शंकर लाल उइके ने भी इस मामले को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करने का प्रस्ताव रखा। सांसदों को बाद में बुलाने की रणनीति बनी।
32% आरक्षण की मांग..
आदिवासी समाज आरक्षण में कटौती से चिंतित है, ऐसे में वे सीएम भूपेश बघेल से मिलकर 32% आरक्षण जारी रखने की मांग करेंगे। आदिवासी सांसदों और विधायकों से भी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण बरकरार रखने ज्ञापन सौंपेंगे। बैठक में समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की जाएगी। इसके लिए किसी कानूनी जानकार को नियुक्त किया जाएगा। हाईकोर्ट के फैसले की प्रति का अध्ययन करने के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा। सचिव डॉ. शंकरलाल उइके और पीएल सिदार को मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समन्वय बनाएंगे। बैठक में अध्यक्ष भारत सिंह, आरबी सिंह, बीपीएस नेताम, जे मिंज, कल्याण सिंह बरिहा महासमुंद, रोहित सिदार रायगढ़, शिव प्रसाद चंद्रवंशी भिलाई, कोषाध्यक्ष निर्मल कुमार टोप्पो दुर्ग, सुदर्शन सिंह ठाकुर भिलाई, तोषण कुमार ठाकुर दुर्ग, केपी ध्रुव, ओमप्रकाश चंद्रवंशी, पौलुस बरवा, सोनऊराम नेताम व उदयराम नेताम कांकेर, अमृत कुमार कुजूर, मनोहर ठाकुर अध्यक्ष महासमुंद जिला, पीआर नाईर, प्रीतम सिंह दीवान महासमुंद, एनएस ठाकुर, एसएस सोरी, शारदा मंडलोई, डॉ. वेदवंती मंडावी भी शामिल हुईं।

आदिवासी वर्ग से विधायक मंत्री-

मौजूदा सरकार में आदिवासी वर्ग से रामपुकार सिंह, कवासी लखमा, मनोज मंडावी, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, अमरजीत भगत, देवेंद्र बहादुर सिंह, गुलाब कमरो, डॉ. लालजीत सिंह राठिया, वृहस्पति सिंह, चिंतामणि महराज, विनय कुमार भगत, मोहितराम केरकेट्‌टा, विक्रम मंडावी, देवती कर्मा, पुरुषोत्तम कंवर, डॉ. केके ध्रुव, डॉ. लक्ष्मी ध्रुव, अनीला भेंडिया, इंद्रशाह मंडावी, चंदन कश्यप, शिशुपाल सोरी, संतराम नेताम, लखेश्वर बघेल, राजमन बेंजाम, विक्रम मंडावी, मोहन मरकाम, सांसद दीपक बैज बस्तर (कांग्रेस)

मौजूदा आरक्षण व्यवस्था

राज्य शासन ने आरक्षण नीति में बदलाव करते हुए 18 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की थी, इसके तहत लोकसेवा (अजा, अजजा एवं पिछड़ा वर्ग का आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा-4 में संशोधन किया गया था। इसके अनुसार अजजा वर्ग को 32 फीसदी, अजा वर्ग को 12 फीसदी और पिछड़ा वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था। हाई कोर्ट ने यहां लागू 58 प्रतिशत आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला करते हुए इसे खारिज कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 2012 में 58 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी की थी, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण को 50 से बढ़ाकर 58 फीसदी करना असंवैधानिक है।

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